📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Maulik Kansara
अपराध
गुजरात हाई कोर्ट ने कच्छ में 8 दुकानों के अवैध ध्वंस के आरोप पर नोटिस जारी
✍️ Live Law
🗓 03 सित. 2026, 01:35 PM
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गुजरात हाई कोर्ट ने कच्छ में आठ दुकानों के अवैध ध्वंस के आरोप वाले याचिका पर नोटिस जारी किया है।
गुजरात हाई कोर्ट ने मंगलवार को कच्छ जिले में आठ दुकानों के अवैध ध्वंस के आरोप वाली याचिका पर राज्य सरकार को औपचारिक नोटिस जारी किया। यह याचिका स्थानीय व्यापारियों के संघ द्वारा दायर की गई थी, जिसमें कहा गया है कि उचित आदेश या मुआवजा दिए बिना ही दुकानें ध्वस्त की गईं, जिससे कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन हुआ।
याचिका के अनुसार, पिछले महीने की शुरुआती तारीखों में इन दुकानों को ध्वस्त किया गया, जिससे दुकान मालिकों की आजीविका प्रभावित हुई और उन्होंने न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की। व्यापारियों के समूह ने अदालत से आदेश देने को कहा है कि ध्वस्त संरचनाओं को पुनः स्थापित किया जाए या उचित मुआवजा प्रदान किया जाए।
कोर्ट ने राज्य प्रशासन से ध्वंस की वैधता और प्रभावित व्यापारियों की शिकायतों को सुलझाने के लिए उठाए गए कदमों पर जवाब मांगा है। इस मामले की आगे की सुनवाई में दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य की जांच की जाएगी।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे नोटिस न्यायिक प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं, जिससे सरकार को अपने कार्यों की व्याख्या करने का अवसर मिलता है, इससे पहले कि कोई अतिरिक्त आदेश जारी किया जाए। इस निर्णय का राज्य में अनधिकृत ध्वंस के मामलों पर प्रभाव पड़ सकता है।
व्यापारी संघ ने जनता और मीडिया से इस प्रक्रिया को नज़र में रखने का आग्रह किया है, क्योंकि इसका क्षेत्र के छोटे व्यवसायों पर व्यापक असर पड़ सकता है।
याचिका के अनुसार, पिछले महीने की शुरुआती तारीखों में इन दुकानों को ध्वस्त किया गया, जिससे दुकान मालिकों की आजीविका प्रभावित हुई और उन्होंने न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की। व्यापारियों के समूह ने अदालत से आदेश देने को कहा है कि ध्वस्त संरचनाओं को पुनः स्थापित किया जाए या उचित मुआवजा प्रदान किया जाए।
कोर्ट ने राज्य प्रशासन से ध्वंस की वैधता और प्रभावित व्यापारियों की शिकायतों को सुलझाने के लिए उठाए गए कदमों पर जवाब मांगा है। इस मामले की आगे की सुनवाई में दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य की जांच की जाएगी।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे नोटिस न्यायिक प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं, जिससे सरकार को अपने कार्यों की व्याख्या करने का अवसर मिलता है, इससे पहले कि कोई अतिरिक्त आदेश जारी किया जाए। इस निर्णय का राज्य में अनधिकृत ध्वंस के मामलों पर प्रभाव पड़ सकता है।
व्यापारी संघ ने जनता और मीडिया से इस प्रक्रिया को नज़र में रखने का आग्रह किया है, क्योंकि इसका क्षेत्र के छोटे व्यवसायों पर व्यापक असर पड़ सकता है।