📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Maulik Kansara
राजनीति
गुजरात हाईकोर्ट ने मोदी डिग्री केस में केजरीवाल की याचिका खारिज की
✍️ News18
🗓 01 अक्टू. 2026, 10:16 PM
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गुजरात हाईकोर्ट ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा पीएम नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक योग्यता की जांच को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है।
गुजरात हाईकोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक योग्यता से संबंधित जांच को रोकने के लिए दायर की गई याचिका को खारिज कर दिया। केजरीवाल ने इस जांच को राजनीतिक कारणों से चलाया जाने का आरोप लगाते हुए कोर्ट से रोक का अनुरोध किया था, परन्तु न्यायालय ने इन दलीलों को अस्वीकार कर याचिका को निरस्त कर दी।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि न्यायालय का यह निर्णय जांच एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप न करने की नीति को दर्शाता है। इस प्रकार की आगे की चुनौती को उचित कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से ही उठाया जा सकता है, सीधे कोर्ट में नहीं।
यह फैसला केंद्रीय सूचना आयोग के हालिया आदेश के बाद आया है, जिसमें इस मामले से जुड़े दस्तावेजों के खुलासे की मांग की गई थी। जबकि सीआईसी आदेश ने अलग विवाद को जन्म दिया है, हाईकोर्ट का निर्णय केवल केजरीवाल की याचिका तक सीमित रहा।
दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों ने आगे की स्थिति स्पष्ट होने तक कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की है। डिग्री संबंधी आरोपों की जांच अभी भी नियत प्राधिकरणों के अधीन जारी है।
यह परिणाम आगामी चुनावी परिदृश्य को प्रभावित करने की संभावना रखता है, क्योंकि ruling party और विपक्ष दोनों ही इस कानूनी प्रक्रिया को बारीकी से देख रहे हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि न्यायालय का यह निर्णय जांच एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप न करने की नीति को दर्शाता है। इस प्रकार की आगे की चुनौती को उचित कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से ही उठाया जा सकता है, सीधे कोर्ट में नहीं।
यह फैसला केंद्रीय सूचना आयोग के हालिया आदेश के बाद आया है, जिसमें इस मामले से जुड़े दस्तावेजों के खुलासे की मांग की गई थी। जबकि सीआईसी आदेश ने अलग विवाद को जन्म दिया है, हाईकोर्ट का निर्णय केवल केजरीवाल की याचिका तक सीमित रहा।
दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों ने आगे की स्थिति स्पष्ट होने तक कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की है। डिग्री संबंधी आरोपों की जांच अभी भी नियत प्राधिकरणों के अधीन जारी है।
यह परिणाम आगामी चुनावी परिदृश्य को प्रभावित करने की संभावना रखता है, क्योंकि ruling party और विपक्ष दोनों ही इस कानूनी प्रक्रिया को बारीकी से देख रहे हैं।