📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / MoE of India
स्वास्थ्य
सरकार ने दवा निर्माताओं के लिए अनिवार्य बैच‑रिलीज़ प्राधिकरण प्रस्तावित किया
✍️ TripuraTimes.com
🗓 04 नव. 2026, 10:03 AM
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केन्द्र सरकार ने सभी दवा कंपनियों को दवाओं के बाजार में आने से पहले बैच‑रिलीज़ प्राधिकरण लेना अनिवार्य करने का मसौदा प्रस्ताव जारी किया।
नई दिल्ली – केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक मसौदा नियमावली पेश की है, जिसमें सभी दवा निर्माताओं को प्रत्येक बैच को बाजार में जारी करने से पहले बैच‑रिलीज़ प्राधिकरण लेना अनिवार्य किया गया है। यह प्रस्ताव गुणवत्ता नियंत्रण को कड़ा करने, ताकि प्रत्येक उत्पादन लॉट निर्धारित सुरक्षा और प्रभावशीलता मानकों को पूरा करे।
मसौदे के तहत, निर्माताओं को विस्तृत बैच रिकॉर्ड नियत प्राधिकरण को सौंपना होगा, जो GMP (गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज) के अनुपालन की जाँच करेगा और यादृच्छिक परीक्षण करेगा। केवल प्राधिकरण की औपचारिक स्वीकृति मिलने पर ही बैच को फार्मेसियों और अस्पतालों में वितरित किया जा सकेगा।
मंत्रालय का कहना है कि यह कदम घटिया दवाओं को रोकने और सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा करने के लिए है, विशेषकर हाल ही में दूषित बैचों की वापसी के बाद। उद्योग प्रतिनिधियों को मसौदे पर अपनी राय देने के लिए आमंत्रित किया गया है।
यदि लागू किया गया, तो यह नियम पूरे देश में लागू होगा, जिससे घरेलू तथा भारत में कार्यरत बहुराष्ट्रीय कंपनियों दोनों प्रभावित होंगी। सरकार ने कंपनियों को अपने गुणवत्ता‑नियंत्रण प्रक्रियाओं को अनुकूलित करने के लिए चरणबद्ध कार्यान्वयन समय‑सीमा की घोषणा करने का संकेत दिया है।
हितधारकों को अगले 60 दिनों के भीतर अपना फीडबैक प्रस्तुत करने का समय दिया गया है, जिसके बाद अंतिम नियमावली आधिकारिक रूप से राजपत्रित होगी।
मसौदे के तहत, निर्माताओं को विस्तृत बैच रिकॉर्ड नियत प्राधिकरण को सौंपना होगा, जो GMP (गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज) के अनुपालन की जाँच करेगा और यादृच्छिक परीक्षण करेगा। केवल प्राधिकरण की औपचारिक स्वीकृति मिलने पर ही बैच को फार्मेसियों और अस्पतालों में वितरित किया जा सकेगा।
मंत्रालय का कहना है कि यह कदम घटिया दवाओं को रोकने और सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा करने के लिए है, विशेषकर हाल ही में दूषित बैचों की वापसी के बाद। उद्योग प्रतिनिधियों को मसौदे पर अपनी राय देने के लिए आमंत्रित किया गया है।
यदि लागू किया गया, तो यह नियम पूरे देश में लागू होगा, जिससे घरेलू तथा भारत में कार्यरत बहुराष्ट्रीय कंपनियों दोनों प्रभावित होंगी। सरकार ने कंपनियों को अपने गुणवत्ता‑नियंत्रण प्रक्रियाओं को अनुकूलित करने के लिए चरणबद्ध कार्यान्वयन समय‑सीमा की घोषणा करने का संकेत दिया है।
हितधारकों को अगले 60 दिनों के भीतर अपना फीडबैक प्रस्तुत करने का समय दिया गया है, जिसके बाद अंतिम नियमावली आधिकारिक रूप से राजपत्रित होगी।