📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Original: Samudra Bikash Hazarika
Derivative wor
रक्षा
सरकार ने मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के अतिरिक्त क्षेत्रों में एएफएसपीए का विस्तार किया
✍️ The Siasat Daily
🗓 27 सित. 2026, 03:37 AM
👁 12
केंद्रीय सरकार ने सुरक्षा कारणों से मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के नए क्षेत्रों में सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम (एएफएसपीए) का विस्तार किया है।
नई दिल्ली ने गुरुवार को घोषणा की कि सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम (एएफएसपीए) का विस्तार मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के कुछ अतिरिक्त जिलों तक किया जाएगा। यह कदम, एएफएसपीए के विस्तार प्रावधान के तहत, इन क्षेत्रों में जारी उग्रवाद और सीमा पार खतरों को काबू करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
गृह मंत्रालय के अनुसार, यह विस्तार अगले छह महीने के लिए लागू रहेगा, जिसके बाद इसकी प्रभावशीलता का पुनर्मूल्यांकन किया जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि यह अस्थायी उपाय सुरक्षा बलों को उग्रवादी गतिविधियों के खिलाफ सशक्त कार्रवाई करने की अनुमति देता है, साथ ही नागरिकों को न्यूनतम नुकसान पहुँचाने का प्रयास करता है।
मानवाधिकार संगठनों ने एएफएसपीए के दुरुपयोग को लेकर पहले भी चिंता जताई है, परंतु सरकार का मानना है कि अस्थिर क्षेत्रों में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कानून आवश्यक है। विस्तार के तहत उन विशिष्ट जिलों को शामिल किया गया है, जिन्हें मंत्रालय ने खुफिया जानकारी के आधार पर चुना है, हालांकि सटीक स्थान सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
यह घोषणा उत्तर‑पूर्व में विभिन्न जनजातीय और राजनीतिक नेताओं के साथ चल रही वार्ताओं के बीच आई है, जो अधिक स्वायत्तता और विकास की माँग कर रहे हैं। एएफएसपीए का विस्तार इन वार्ताओं को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि सुरक्षा पहलू अभी भी क्षेत्र की नीति ढाँचे में प्रमुख कारक बने हुए हैं।
घोषणा के बाद तत्काल कोई विरोध प्रदर्शन नहीं देखा गया, और सुरक्षा बलों को नई कवरेज वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त कर्मी तैनात करने की तैयारी के तहत कहा गया है, ताकि स्थिरता बनी रहे और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
गृह मंत्रालय के अनुसार, यह विस्तार अगले छह महीने के लिए लागू रहेगा, जिसके बाद इसकी प्रभावशीलता का पुनर्मूल्यांकन किया जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि यह अस्थायी उपाय सुरक्षा बलों को उग्रवादी गतिविधियों के खिलाफ सशक्त कार्रवाई करने की अनुमति देता है, साथ ही नागरिकों को न्यूनतम नुकसान पहुँचाने का प्रयास करता है।
मानवाधिकार संगठनों ने एएफएसपीए के दुरुपयोग को लेकर पहले भी चिंता जताई है, परंतु सरकार का मानना है कि अस्थिर क्षेत्रों में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कानून आवश्यक है। विस्तार के तहत उन विशिष्ट जिलों को शामिल किया गया है, जिन्हें मंत्रालय ने खुफिया जानकारी के आधार पर चुना है, हालांकि सटीक स्थान सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
यह घोषणा उत्तर‑पूर्व में विभिन्न जनजातीय और राजनीतिक नेताओं के साथ चल रही वार्ताओं के बीच आई है, जो अधिक स्वायत्तता और विकास की माँग कर रहे हैं। एएफएसपीए का विस्तार इन वार्ताओं को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि सुरक्षा पहलू अभी भी क्षेत्र की नीति ढाँचे में प्रमुख कारक बने हुए हैं।
घोषणा के बाद तत्काल कोई विरोध प्रदर्शन नहीं देखा गया, और सुरक्षा बलों को नई कवरेज वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त कर्मी तैनात करने की तैयारी के तहत कहा गया है, ताकि स्थिरता बनी रहे और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।