📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Anushka10patel
बिज़नेस
कटनी मार्बल को जीआई टैग मिलने की प्रक्रिया शुरू, विश्व स्तर पर पहचान की दिशा में
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 25 सित. 2026, 01:31 PM
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कटनी, मध्य प्रदेश के मार्बल निर्माताओं ने उद्योग की मांग पर जिला कलेक्टर के निर्देश से जीआई टैग पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू की।
कटनी का मार्बल, अपनी विशिष्ट बनावट और टिकाऊपन के लिए प्रसिद्ध, अब भौगोलिक संकेत (जीआई) पंजीकरण की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। यह कदम उत्पाद की अनूठी पहचान को सुरक्षित करने और देश‑विदेश में इसके नाम के दुरुपयोग को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।
स्थानीय व्यापारियों की लगातार मांग पर जिला कलेक्टर ने कटनी मार्बल एसोसिएशन का गठन करने और जीआई आवेदन प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है। एसोसिएशन को क्षेत्रीय इतिहास, उत्पादन विधियों और गुणवत्ता प्रमाणों सहित आवश्यक दस्तावेज़ तैयार करके जीआई रजिस्ट्री में जमा करने होंगे।
जीआई टैग मिलने पर निर्यात के नए अवसर खुलेंगे, कारीगरों को बेहतर मूल्य मिलेगा और नकली उत्पादों के खिलाफ कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित होगी। अधिकारियों का मानना है कि यह मान्यता कटनी मार्बल को कांचिपुरम सिल्क और दार्जिलिंग चाय जैसे अन्य भारतीय जीआई‑टैग्ड उत्पादों के साथ वैश्विक स्तर पर स्थापित करेगी।
पंजीकरण प्रक्रिया में कई महीने लग सकते हैं, जिसमें फील्ड निरीक्षण और विशेषज्ञ मूल्यांकन शामिल होगा, जिसके बाद अंतिम प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा।
स्थानीय व्यापारियों की लगातार मांग पर जिला कलेक्टर ने कटनी मार्बल एसोसिएशन का गठन करने और जीआई आवेदन प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है। एसोसिएशन को क्षेत्रीय इतिहास, उत्पादन विधियों और गुणवत्ता प्रमाणों सहित आवश्यक दस्तावेज़ तैयार करके जीआई रजिस्ट्री में जमा करने होंगे।
जीआई टैग मिलने पर निर्यात के नए अवसर खुलेंगे, कारीगरों को बेहतर मूल्य मिलेगा और नकली उत्पादों के खिलाफ कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित होगी। अधिकारियों का मानना है कि यह मान्यता कटनी मार्बल को कांचिपुरम सिल्क और दार्जिलिंग चाय जैसे अन्य भारतीय जीआई‑टैग्ड उत्पादों के साथ वैश्विक स्तर पर स्थापित करेगी।
पंजीकरण प्रक्रिया में कई महीने लग सकते हैं, जिसमें फील्ड निरीक्षण और विशेषज्ञ मूल्यांकन शामिल होगा, जिसके बाद अंतिम प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा।