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घर बचाने सड़क पर उतरे आली गांव के लोग, आज से कब्जा हटाने की कार्रवाई की तैयारी
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आली गांव में आज से चलेगा बुलडोजर? 1800 मकान-दुकानों को खाली कराने की तैयारी
नई दिल्ली। दक्षिणी दिल्ली के आली गांव में उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की 8.48 एकड़ जमीन से कथित अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई आज से शुरू होने की खबर है। कोर्ट द्वारा नियुक्त बैलिफ की ओर से जारी नोटिस के अनुसार प्रभावित लोगों को 26 सितंबर तक मकान-दुकान खाली करने की मोहलत दी गई थी, जो अब समाप्त हो चुकी है।
रिपोर्टों के मुताबिक, आली चौक से शिव मंदिर तक पुश्ता रोड के दोनों ओर करीब 1,500 मकान-दुकानों तथा पीर मोहल्ले में लगभग 300 मकानों पर नोटिस चस्पा किए गए हैं। कार्रवाई के दौरान पुलिस बल की मौजूदगी में कब्जे हटाकर जमीन सिंचाई विभाग के कब्जे में लेने की बात कही गई है।
कार्रवाई के विरोध में स्थानीय लोगों का प्रदर्शन
प्रस्तावित कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है। कुछ लोग शिव मंदिर के पास धरने पर बैठे हैं। उनका कहना है कि वे वर्षों से यहां रह रहे हैं और अचानक घर तथा कारोबार खाली करना उनके लिए बेहद मुश्किल है। स्थानीय लोगों ने कार्रवाई रोकने और नोटिस वापस लेने की मांग की है।
अदालती फैसले के बाद तेज हुई कार्रवाई
मामला लंबे समय से अदालत में चल रहा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार वर्ष 2002 में सिंचाई विभाग के पक्ष में फैसला आया था और 2004 में कुछ हिस्सों से कब्जे हटाए भी गए थे। बाद में आबादी वाले हिस्सों में कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। हालिया अदालती आदेशों के बाद अब कार्रवाई फिर तेज हुई है।
रिपोर्टों के मुताबिक, आली चौक से शिव मंदिर तक पुश्ता रोड के दोनों ओर करीब 1,500 मकान-दुकानों तथा पीर मोहल्ले में लगभग 300 मकानों पर नोटिस चस्पा किए गए हैं। कार्रवाई के दौरान पुलिस बल की मौजूदगी में कब्जे हटाकर जमीन सिंचाई विभाग के कब्जे में लेने की बात कही गई है।
कार्रवाई के विरोध में स्थानीय लोगों का प्रदर्शन
प्रस्तावित कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है। कुछ लोग शिव मंदिर के पास धरने पर बैठे हैं। उनका कहना है कि वे वर्षों से यहां रह रहे हैं और अचानक घर तथा कारोबार खाली करना उनके लिए बेहद मुश्किल है। स्थानीय लोगों ने कार्रवाई रोकने और नोटिस वापस लेने की मांग की है।
अदालती फैसले के बाद तेज हुई कार्रवाई
मामला लंबे समय से अदालत में चल रहा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार वर्ष 2002 में सिंचाई विभाग के पक्ष में फैसला आया था और 2004 में कुछ हिस्सों से कब्जे हटाए भी गए थे। बाद में आबादी वाले हिस्सों में कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। हालिया अदालती आदेशों के बाद अब कार्रवाई फिर तेज हुई है।