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26 सित. 2026•
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गया में मौत से पहले खुद का पिंडदान करने की अनोखी परंपरा आज भी जारी
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Hiten Jain (Glory of Jainism)
धर्म

गया में मौत से पहले खुद का पिंडदान करने की अनोखी परंपरा आज भी जारी

✍️ Amar Ujala · Bihar 🗓 26 सित. 2026, 03:36 PM 👁 11
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बिहार के गया में एक अनोखी प्रथा है जहाँ लोग अपनी मृत्यु से पहले खुद का पिंडदान करवाते हैं, जो आज भी जारी है।

बिहार के गया शहर में एक अनोखी रीति रिवाज है जहाँ व्यक्ति अपनी मृत्यु से पहले ही पिंडदान करवा लेता है। यह अनुष्ठान विष्णुपाद मंदिर तथा निकटवर्ती श्मशान घाटों पर पुजारी की मार्गदर्शन में किया जाता है, जहाँ साधारणतः मृत्यु के बाद ही पिंडदान किया जाता है।

स्थानीय लोग मानते हैं कि जीवनकाल में ही पिंडदान करवा लेने से उनके पूर्वजों को शीघ्र शांति मिलती है और जीवित परिवारजनों को बाद में कोई कठिनाई नहीं होती। इस समारोह में दाता चावल के पिंड को अग्नि‑रोधक थाली में रखता है, मंत्रोच्चार करता है और जल व फूल अर्पित करता है; इसके बाद पुजारी इस कार्य को मंदिर के रजिस्टर में दर्ज कर देते हैं।

यह प्रथा शताब्दियों से चली आ रही है और आज भी बुजुर्ग वर्ग में लोकप्रिय है, जो इसे आत्मा की शांति और भविष्य में अनुष्ठानिक त्रुटियों से बचाव का साधन मानते हैं। जबकि युवा वर्ग अक्सर पारंपरिक मृत्यु‑उपरांत पिंडदान को प्राथमिकता देता है, यह अनोखी परंपरा सांस्कृतिक शोधकर्ताओं और पर्यटकों को बिहार की जीवित विरासत की ओर आकर्षित करती रहती है।
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