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01 Nov 2026•
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ग्वालियर के वृंदावन ग्रामों में देशी गौवंश प्रतियोगिता से मिली लाख रुपये की पुरस्कार राशि

✍️ Reporter: Pranav Gaur 🗓 01 Nov 2026, 04:18 PM 👁 13
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ग्वालियर जिले के वृंदावन ग्रामों में 30 और 31 अक्टूबर को आयोजित गोपाल कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना के तहत देशी गायों की दो दिवसीय प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार के रूप में एक लाख रुपये, द्वितीय 50 हजार और तृतीय 25 हजार रुपये दिए गए।

ग्वालियर जिले के वृंदावन ग्रामों में राज्य शासन के दिशा-निर्देशों के तहत गोपाल कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना के अंतर्गत देशी गौवंश की दो दिवसीय प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं। 30 व 31 अक्टूबर को बेहट के स्थानीय मंडी परिसर, टेकनपुर के पंचायत भवन डबरा और सिमिरियाटांका के पंचायत भवन में प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ।

टेकनपुर में आयोजित प्रतियोगिता में श्री रामवीर सिंह परिहार की हरियाणा नस्ल की गाय प्रथम स्थान पर रही, जिसका प्रतिदिन दूध उत्पादन 14.06 लिटर रहा। दूसरे स्थान पर श्रीराम फौजी की गिरि नस्ल की गाय रही, जिसका उत्पादन 11.19 लिटर प्रतिदिन था, और तृतीय स्थान पर श्री उपेन्द्र सिंह परिहार की मालवीय नस्ल की गाय रही, जिसका उत्पादन 6.04 लिटर प्रतिदिन था।

बेहत में प्रतियोगिता में श्री अंशू यादव की शाहीवाल नस्ल की गाय प्रथम स्थान पर रही, जिसका प्रतिदिन दूध उत्पादन 6.3 लिटर रहा। दूसरे स्थान पर श्री मोनू गुर्जर की देशी गाय रही, जिसका उत्पादन 4.66 लिटर प्रतिदिन था, और तृतीय स्थान पर श्री नरेन्द्र गुर्जर की देशी गाय रही, जिसका उत्पादन 4.4 लिटर प्रतिदिन था।

सिमिरियाटांका में श्रीमतल लक्ष्मी की हरियाणा नस्ल की गाय प्रथम स्थान पर रही, जिसका प्रतिदिन दूध उत्पादन 7.323 लिटर रहा। दूसरे स्थान पर श्री नवल सिंह की शाहीवाल नस्ल की गाय रही, जिसका उत्पादन 6.981 लिटर प्रतिदिन था, और तृतीय स्थान पर श्री किशन रावत की गिरि नस्ल की गाय रही, जिसका उत्पादन 6.201 लिटर प्रतिदिन था। उप संचालक पशुपालन एवं डेयरी डॉ. दिलीप कुमार गुप्ता ने बताया कि प्रतियोगिता के तहत 30 व 31 अक्टूबर को सुबह व शाम गायों के दूध की माप की गई। सबसे अधिक दूध देने वाली गाय को प्रथम पुरस्कार के रूप में एक लाख रुपये, द्वितीय पुरस्कार के तहत 50 हजार और तृतीय पुरस्कार के तहत 25 हजार रुपये प्रदान किए जाएंगे। पुरस्कार राशि का उपयोग देशी गौवंशीय पशुधन क्रय संरक्षण संवर्धन के लिये किया जा सकेगा, और विजेता प्रतिभागी अपने गौवंश को 6 माह तक नहीं बेच सकेंगे।
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