Crime
गुजरात में ₹50 प्रतिदिन लेट फीस के विरोध में अन्य राज्यों से हो रहा फर्जी फिटनेस सर्टिफिकेट का खेल
गुजरात में व्यावसायिक वाहनों के फिटनेस नवीनीकरण में देरी पर ₹50 प्रतिदिन की भारी लेट फीस के कारण वाहन मालिक अन्य राज्यों से बिना वाहन दिखाए फिटनेस प्रमाण पत्र बनवा रहे हैं, जिससे सड़क सुरक्षा और राजस्व पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
गुजरात में व्यावसायिक और वाणिज्यिक वाहनों के फिटनेस प्रमाणपत्र के नवीनीकरण पर प्रतिदिन ₹50 की दर से लगने वाली लेट फीस ने वाहन मालिकों और ट्रांसपोर्टरों के बीच भारी असंतोष पैदा कर दिया है। इस भारी जुर्माने से बचने के लिए, कई वाहन मालिक अब अन्य राज्यों, विशेषकर उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड का सहारा ले रहे हैं। ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जहाँ बिचौलियों और फर्जी व्यवस्थाओं के जरिए बिना वाहन को RTO में भौतिक रूप से पेश किए ही फिटनेस प्रमाणपत्र जारी किए जा रहे हैं।
यह प्रवृत्ति वाहन मालिकों पर भारी वित्तीय बोझ डाल रही है, क्योंकि फिटनेस नवीनीकरण में कुछ महीनों की देरी भी हजारों रुपयों के जुर्माने में बदल जाती है। गुजरात में भारी पेनल्टी से बचने के लिए, वाहन मालिक एजेंटों के माध्यम से उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से बिना गाड़ी RTO ले जाए फिटनेस प्रमाणपत्र प्राप्त कर रहे हैं।
बिना तकनीकी और यांत्रिक जांच के फिटनेस सर्टिफिकेट जारी होने से खटारा और असुरक्षित वाहन सड़कों पर बेधड़क दौड़ रहे हैं, जिससे गंभीर हादसों का खतरा बढ़ गया है। साथ ही, इस अनुचित तरीके से गुजरात RTO को मिलने वाले आधिकारिक शुल्क और लेट फीस के राजस्व का भी बड़ा नुकसान हो रहा है।
ट्रांसपोर्ट संगठनों और यातायात विशेषज्ञों ने सरकार से प्रतिदिन लगने वाले ₹50 लेट फीस के नियम पर पुनर्विचार करने की मांग की है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने सभी राज्यों के RTO के बीच एक एकीकृत डेटा सत्यापन और जांच प्रक्रिया को कड़ा करने का आग्रह किया है ताकि बिना वाहन पेश किए जारी होने वाले फर्जी फिटनेस सर्टिफिकेट पर प्रभावी ढंग से रोक लगाई जा सके।
यह प्रवृत्ति वाहन मालिकों पर भारी वित्तीय बोझ डाल रही है, क्योंकि फिटनेस नवीनीकरण में कुछ महीनों की देरी भी हजारों रुपयों के जुर्माने में बदल जाती है। गुजरात में भारी पेनल्टी से बचने के लिए, वाहन मालिक एजेंटों के माध्यम से उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से बिना गाड़ी RTO ले जाए फिटनेस प्रमाणपत्र प्राप्त कर रहे हैं।
बिना तकनीकी और यांत्रिक जांच के फिटनेस सर्टिफिकेट जारी होने से खटारा और असुरक्षित वाहन सड़कों पर बेधड़क दौड़ रहे हैं, जिससे गंभीर हादसों का खतरा बढ़ गया है। साथ ही, इस अनुचित तरीके से गुजरात RTO को मिलने वाले आधिकारिक शुल्क और लेट फीस के राजस्व का भी बड़ा नुकसान हो रहा है।
ट्रांसपोर्ट संगठनों और यातायात विशेषज्ञों ने सरकार से प्रतिदिन लगने वाले ₹50 लेट फीस के नियम पर पुनर्विचार करने की मांग की है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने सभी राज्यों के RTO के बीच एक एकीकृत डेटा सत्यापन और जांच प्रक्रिया को कड़ा करने का आग्रह किया है ताकि बिना वाहन पेश किए जारी होने वाले फर्जी फिटनेस सर्टिफिकेट पर प्रभावी ढंग से रोक लगाई जा सके।