गड्ढों और कीचड़ से गुजरने को मजबूर राहगीर
अमेठी। जिले के भीमी से टीकरमाफी आश्रम को जोड़ने वाला मार्ग निर्माण के महज दो साल के भीतर ही बदहाली का शिकार हो गया है। करीब 80 लाख रुपये की लागत से बनी पांच से छह किलोमीटर लंबी सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पहली ही बरसात में सड़क उखड़ने लगी थी। सड़क की मौजूदा स्थिति ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और जिम्मेदारों की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस मार्ग से प्रतिदिन सैकड़ों स्कूली बच्चे, बुजुर्ग और टीकरमाफी आश्रम आने वाले श्रद्धालु आवागमन करते हैं। सड़क पर गड्ढे होने से लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, बारिश के दौरान सड़क पर पानी और कीचड़ भर जाने से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। कई राहगीरों के चोटिल होने की बात भी सामने आई है। खराब सड़क के कारण बच्चों और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है।
वारंटी खत्म होने की दलील, अगले वित्तीय वर्ष में मरम्मत का आश्वासन
मामले में जिला पंचायत विभाग के जूनियर इंजीनियर आशीष कुमार ने बताया कि सड़क की गारंटी अवधि समाप्त हो चुकी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि आगामी वित्तीय वर्ष की कार्ययोजना में सड़क को शामिल कर गड्ढामुक्त करने और मरम्मत का कार्य कराया जाएगा।
80 लाख खर्च होने के बावजूद गुणवत्ता पर सवाल
विभाग की ओर से मरम्मत का आश्वासन मिलने के बावजूद ग्रामीणों में नाराजगी है। उनका सवाल है कि यदि सड़क का निर्माण मानकों के अनुरूप हुआ था, तो महज दो साल में उसकी हालत इतनी खराब कैसे हो गई? ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की उच्चस्तरीय जांच कराने, निर्माण की गुणवत्ता की तकनीकी जांच करने तथा संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार विभाग सड़क की मरम्मत कब तक कराता है और निर्माण की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों पर क्या कार्रवाई होती है।
नीड 24 उल्लखित आरोपों की स्वतंत्रता से पुष्टि नहीं करता
इस मार्ग से प्रतिदिन सैकड़ों स्कूली बच्चे, बुजुर्ग और टीकरमाफी आश्रम आने वाले श्रद्धालु आवागमन करते हैं। सड़क पर गड्ढे होने से लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, बारिश के दौरान सड़क पर पानी और कीचड़ भर जाने से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। कई राहगीरों के चोटिल होने की बात भी सामने आई है। खराब सड़क के कारण बच्चों और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है।
वारंटी खत्म होने की दलील, अगले वित्तीय वर्ष में मरम्मत का आश्वासन
मामले में जिला पंचायत विभाग के जूनियर इंजीनियर आशीष कुमार ने बताया कि सड़क की गारंटी अवधि समाप्त हो चुकी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि आगामी वित्तीय वर्ष की कार्ययोजना में सड़क को शामिल कर गड्ढामुक्त करने और मरम्मत का कार्य कराया जाएगा।
80 लाख खर्च होने के बावजूद गुणवत्ता पर सवाल
विभाग की ओर से मरम्मत का आश्वासन मिलने के बावजूद ग्रामीणों में नाराजगी है। उनका सवाल है कि यदि सड़क का निर्माण मानकों के अनुरूप हुआ था, तो महज दो साल में उसकी हालत इतनी खराब कैसे हो गई? ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की उच्चस्तरीय जांच कराने, निर्माण की गुणवत्ता की तकनीकी जांच करने तथा संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार विभाग सड़क की मरम्मत कब तक कराता है और निर्माण की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों पर क्या कार्रवाई होती है।
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