📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / TheSlumPanda
अपराध
जोधपुर: जोजरी नदी में अवैध रासायनिक अपशिष्ट के लिए 4 उद्यमियों को गिरफ्तार
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 26 अग. 2026, 07:47 PM
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विशेष जांच दल ने जोजरी नदी में रासायनिक जल बहाने वाली अवैध बाइपास पाइपलाइन पाई और चार उद्यमियों को गिरफ्तार किया।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (SIT) ने जोधपुर में जोजरी नदी में खतरनाक औद्योगिक अपशिष्ट बहाने के आरोप में चार उद्यमियों को हिरासत में लिया है। सीईटीपी (CETP) के बाहर की जाँच के दौरान, अधिकारियों ने एक अवैध बाइपास पाइपलाइन पाई, जो रासायनिक‑युक्त जल को सीधे नदी में बहा रही थी।
यह पाइपलाइन उचित उपचार प्रक्रिया से बचने के लिए स्थापित की गई थी, जिससे जांच दल ने संबंधित कंपनियों की विस्तृत जाँच शुरू कर दी। गिरफ्तार किए गए चार व्यक्तियों को उद्यमियों या उनके वरिष्ठ प्रबंधकों के रूप में पहचाना गया और उन्हें पर्यावरणीय उल्लंघन तथा विषाक्त अपशिष्ट के अवैध निकास के आरोपों में गिरफ्तार किया गया।
पाइपलाइन को बंद कर दिया गया है और निकाले गए जल की विषाक्तता का निर्धारण करने के लिए आगे की फोरेंसिक जांच चल रही है। यह कार्रवाई राजस्थान में पर्यावरण नियमों के कड़ाई से पालन को सुनिश्चित करने के लिए न्यायालय की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले इस क्षेत्र में औद्योगिक निकास की निगरानी के लिए एक समिति बनाकर निगरानी को कड़ा करने का आदेश दिया था, और यह नवीनतम कदम उसी निगरानी का हिस्सा है। स्थानीय प्राधिकरण ने भविष्य में समान उल्लंघनों को रोकने के लिए सीईटीपी की निगरानी को सुदृढ़ करने का आश्वासन दिया है।
पर्यावरण संगठनों ने इस घटना पर चिंता जताई है, क्योंकि अनियंत्रित औद्योगिक अपशिष्ट जलवायु‑संकटग्रस्त पश्चिमी भारत में नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
यह पाइपलाइन उचित उपचार प्रक्रिया से बचने के लिए स्थापित की गई थी, जिससे जांच दल ने संबंधित कंपनियों की विस्तृत जाँच शुरू कर दी। गिरफ्तार किए गए चार व्यक्तियों को उद्यमियों या उनके वरिष्ठ प्रबंधकों के रूप में पहचाना गया और उन्हें पर्यावरणीय उल्लंघन तथा विषाक्त अपशिष्ट के अवैध निकास के आरोपों में गिरफ्तार किया गया।
पाइपलाइन को बंद कर दिया गया है और निकाले गए जल की विषाक्तता का निर्धारण करने के लिए आगे की फोरेंसिक जांच चल रही है। यह कार्रवाई राजस्थान में पर्यावरण नियमों के कड़ाई से पालन को सुनिश्चित करने के लिए न्यायालय की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले इस क्षेत्र में औद्योगिक निकास की निगरानी के लिए एक समिति बनाकर निगरानी को कड़ा करने का आदेश दिया था, और यह नवीनतम कदम उसी निगरानी का हिस्सा है। स्थानीय प्राधिकरण ने भविष्य में समान उल्लंघनों को रोकने के लिए सीईटीपी की निगरानी को सुदृढ़ करने का आश्वासन दिया है।
पर्यावरण संगठनों ने इस घटना पर चिंता जताई है, क्योंकि अनियंत्रित औद्योगिक अपशिष्ट जलवायु‑संकटग्रस्त पश्चिमी भारत में नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।