📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prad2609
बिज़नेस
कांडला, गुजरात में 150 TPD ई‑मेथनॉल प्लांट की नींव रखी गई
✍️ The Assam Tribune
🗓 26 सित. 2026, 05:01 PM
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असम और गुजरात के अधिकारियों ने कांडला में 150 टन‑प्रति‑दिन ई‑मेथनॉल प्लांट की नींव रखी, जिससे भारत की हरित ईंधन पहल को नई दिशा मिली।
असम और गुजरात के सरकारी प्रतिनिधियों ने गुरुवार को कांडला बंदरगाह में 150 टन‑प्रति‑दिन क्षमता वाले ई‑मेथनॉल प्लांट की नींव रखी। यह संयंत्र नवीकरणीय ऊर्जा से उत्पन्न बिजली का उपयोग करके कार्बन डाइऑक्साइड को मेथनॉल में बदलने की तकनीक पर आधारित होगा, जिससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने के राष्ट्रीय लक्ष्य को साकार किया जा सकेगा।
यह परियोजना पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा चलाए जा रहे "हरित ईंधन" पहल का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य परिवहन और उद्योग के लिए वैकल्पिक ईंधन विकसित करना है। अधिकारियों ने बताया कि इस प्लांट को भारत भर में ई‑मेथनॉल उत्पादन को बड़े पैमाने पर बढ़ाने के लिए एक पायलट मॉडल माना गया है, जिससे स्वच्छ डीज़ल मिश्रण और समुद्री ईंधन की आपूर्ति श्रृंखला स्थापित हो सकेगी।
निर्माण कार्य इस वर्ष के अंत में शुरू होने की संभावना है और 2028 तक संचालन शुरू होने की उम्मीद है। इस उद्यम को राज्य सरकारों और निजी साझेदारों का समर्थन मिला है, हालांकि वित्तीय विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। हितधारकों ने कहा कि यह प्लांट कांडला क्षेत्र में कुशल रोजगार सृजन और सहायक उद्योगों को प्रोत्साहित करेगा।
पर्यावरण संगठनों ने इस पहल का स्वागत किया, यह बताते हुए कि नवीकरणीय बिजली से निर्मित ई‑मेथनॉल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम कर सकता है। उन्होंने प्लांट के कार्बन फुटप्रिंट और जल उपयोग की पारदर्शी निगरानी की भी मांग की।
नींव रखी गई इस परियोजना से गुजरात को स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं के केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी, जबकि असम की भागीदारी यह दर्शाती है कि दूरस्थ राज्य भी उभरते हरित ईंधन पारिस्थितिकी तंत्र में योगदान देने के लिए तैयार हैं।
यह परियोजना पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा चलाए जा रहे "हरित ईंधन" पहल का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य परिवहन और उद्योग के लिए वैकल्पिक ईंधन विकसित करना है। अधिकारियों ने बताया कि इस प्लांट को भारत भर में ई‑मेथनॉल उत्पादन को बड़े पैमाने पर बढ़ाने के लिए एक पायलट मॉडल माना गया है, जिससे स्वच्छ डीज़ल मिश्रण और समुद्री ईंधन की आपूर्ति श्रृंखला स्थापित हो सकेगी।
निर्माण कार्य इस वर्ष के अंत में शुरू होने की संभावना है और 2028 तक संचालन शुरू होने की उम्मीद है। इस उद्यम को राज्य सरकारों और निजी साझेदारों का समर्थन मिला है, हालांकि वित्तीय विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। हितधारकों ने कहा कि यह प्लांट कांडला क्षेत्र में कुशल रोजगार सृजन और सहायक उद्योगों को प्रोत्साहित करेगा।
पर्यावरण संगठनों ने इस पहल का स्वागत किया, यह बताते हुए कि नवीकरणीय बिजली से निर्मित ई‑मेथनॉल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम कर सकता है। उन्होंने प्लांट के कार्बन फुटप्रिंट और जल उपयोग की पारदर्शी निगरानी की भी मांग की।
नींव रखी गई इस परियोजना से गुजरात को स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं के केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी, जबकि असम की भागीदारी यह दर्शाती है कि दूरस्थ राज्य भी उभरते हरित ईंधन पारिस्थितिकी तंत्र में योगदान देने के लिए तैयार हैं।