📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Indif
राजनीति
बाड़मेर के शिव क्षेत्र में पूर्व मंत्री अमीन खान और पूर्व कांग्रेस नेता फतेह खान ने पंचायत चुनाव से पहले साथ दिया
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 09 अक्टू. 2026, 02:00 PM
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बाड़मेर के शिव विधानसभा क्षेत्र में पूर्व मंत्री अमीन खान और पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष फतेह खान ने पंचायत चुनाव से पहले एक साथ चुनावी गतिविधियों में भाग लिया, जो तीन साल बाद की पहली मुलाकात है।
बाड़मेर जिले के शिव विधानसभा क्षेत्र में पूर्व मंत्री अमीन खान और पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष फतेह खान ने एक साथ चुनावी गतिविधियों में हिस्सा लिया, जो लगभग तीन साल बाद की पहली सार्वजनिक मुलाकात है। यह कदम पंचायत चुनावों से पहले स्थानीय स्तर पर समर्थन जुटाने के उद्देश्य से किया गया है, जिससे क्षेत्र में शक्ति संतुलन में बदलाव की संभावना दिख रही है।
पंचायत चुनावों की तैयारी के इस चरण में दोनों नेताओं ने स्थानीय समर्थकों के समक्ष विकास और सामाजिक कल्याण के मुद्दों पर प्रकाश डाला। हालांकि कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया, लेकिन现场 रिपोर्टों से पता चलता है कि उन्होंने जल समस्या, बुनियादी ढाँचा और रोजगार जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी। इस सहयोग को देखते हुए भाजपा और आरएलपी ने भी अपनी प्रचार गतिविधियों को तेज कर दिया है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह गठबंधन भाजपा‑आरएलपी गठबंधन की बढ़ती पकड़ को रोकने के लिए एक रणनीतिक कदम हो सकता है। दोनों नेताओं के मिलकर काम करने से विभाजित वोटों को एकत्रित करने की संभावना बढ़ेगी, जिससे पंचायत चुनावों में उनके पक्ष में परिणाम आने की उम्मीद है। यह चुनाव इस गठबंधन की प्रभावशीलता का पहला परीक्षण होगा।
स्थानीय जनता की प्रतिक्रिया मिश्रित रही है; कुछ लोग इस नई साझेदारी को जल संकट और बुनियादी सुविधाओं के समाधान के रूप में देख रहे हैं, जबकि अन्य इस कदम के पीछे के इरादों को लेकर सतर्क हैं। पंचायत चुनावों के परिणाम आगामी राज्य विधानसभा चुनावों के लिए राजनीतिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
पंचायत चुनावों की तैयारी के इस चरण में दोनों नेताओं ने स्थानीय समर्थकों के समक्ष विकास और सामाजिक कल्याण के मुद्दों पर प्रकाश डाला। हालांकि कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया, लेकिन现场 रिपोर्टों से पता चलता है कि उन्होंने जल समस्या, बुनियादी ढाँचा और रोजगार जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी। इस सहयोग को देखते हुए भाजपा और आरएलपी ने भी अपनी प्रचार गतिविधियों को तेज कर दिया है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह गठबंधन भाजपा‑आरएलपी गठबंधन की बढ़ती पकड़ को रोकने के लिए एक रणनीतिक कदम हो सकता है। दोनों नेताओं के मिलकर काम करने से विभाजित वोटों को एकत्रित करने की संभावना बढ़ेगी, जिससे पंचायत चुनावों में उनके पक्ष में परिणाम आने की उम्मीद है। यह चुनाव इस गठबंधन की प्रभावशीलता का पहला परीक्षण होगा।
स्थानीय जनता की प्रतिक्रिया मिश्रित रही है; कुछ लोग इस नई साझेदारी को जल संकट और बुनियादी सुविधाओं के समाधान के रूप में देख रहे हैं, जबकि अन्य इस कदम के पीछे के इरादों को लेकर सतर्क हैं। पंचायत चुनावों के परिणाम आगामी राज्य विधानसभा चुनावों के लिए राजनीतिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।