📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ramesh Lalwani
राजनीति
पूर्व IAS, IFS अधिकारियों ने चुनाव आयोग और SIR की रक्षा में खुला पत्र जारी किया
✍️ The Hindu
🗓 11 अक्टू. 2026, 08:16 PM
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एक समूह के सेवानिवृत्त IAS और IFS अधिकारियों ने द हिंदू में खुला पत्र प्रकाशित कर चुनाव आयोग और राज्य चुनाव आयोग (SIR) की रक्षा की है।
सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय विदेश सेवा (IFS) के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने द हिंदू में प्रकाशित एक खुला पत्र जारी किया है। इस पत्र में उन्होंने चुनाव आयोग और राज्य चुनाव आयोग (SIR) की कार्यप्रणाली पर भरोसा जताते हुए हालिया पक्षपात और प्रक्रिया संबंधी आरोपों का खंडन किया है।
अधिकारियों का कहना है कि ये संस्थाएँ संविधानिक दायित्वों को सटीक रूप से निभा रही हैं और पूरे देश में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावों को सुनिश्चित कर रही हैं। वे मतदाता पंजीकरण, निगरानी तंत्र और विवाद समाधान में पारदर्शिता को उनके विश्वसनीयता के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत करते हैं।
वे यह भी मानते हैं कि किसी भी संस्था को आलोचना का अधिकार है, परंतु बिना ठोस सबूत के राजनीतिक हमले सार्वजनिक भरोसे को नुकसान पहुँचा सकते हैं। इसलिए वे रचनात्मक संवाद और तथ्यात्मक आलोचना की अपील करते हैं, न कि सनसनीखेज़ बयानबाजी की।
यह खुला पत्र भारत जैसी जीवंत लोकतंत्र में चुनावी संस्थाओं की स्वतंत्रता की रक्षा के महत्व को रेखांकित करता है। अंत में, सभी हितधारकों से आयोग के निष्पक्ष कार्य को समर्थन देने का आग्रह किया गया है।
द हिंदू ने इस पत्र का पूरा पाठ अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध कराया है, जिससे पाठक पूर्व अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत तर्कों को पढ़ सकें।
अधिकारियों का कहना है कि ये संस्थाएँ संविधानिक दायित्वों को सटीक रूप से निभा रही हैं और पूरे देश में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावों को सुनिश्चित कर रही हैं। वे मतदाता पंजीकरण, निगरानी तंत्र और विवाद समाधान में पारदर्शिता को उनके विश्वसनीयता के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत करते हैं।
वे यह भी मानते हैं कि किसी भी संस्था को आलोचना का अधिकार है, परंतु बिना ठोस सबूत के राजनीतिक हमले सार्वजनिक भरोसे को नुकसान पहुँचा सकते हैं। इसलिए वे रचनात्मक संवाद और तथ्यात्मक आलोचना की अपील करते हैं, न कि सनसनीखेज़ बयानबाजी की।
यह खुला पत्र भारत जैसी जीवंत लोकतंत्र में चुनावी संस्थाओं की स्वतंत्रता की रक्षा के महत्व को रेखांकित करता है। अंत में, सभी हितधारकों से आयोग के निष्पक्ष कार्य को समर्थन देने का आग्रह किया गया है।
द हिंदू ने इस पत्र का पूरा पाठ अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध कराया है, जिससे पाठक पूर्व अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत तर्कों को पढ़ सकें।