📷 चित्र स्रोत: TOI City (via NewsData)
अपराध
बेलासोर के जंगल में बचाए गए पाँच युवा ओरंगुटान
✍️ TOI City
🗓 09 सित. 2026, 11:40 AM
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ओडिशा के बेलासोर में वन अधिकारियों ने गाँव वालों की सूचना पर लटके हुए पाँच युवा ओरंगुटान बचाए, और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो ने जांच शुरू की।
ओडिशा के बेलासोर जिले में गाँव वालों ने जंगल में लटके हुए पाँच युवा ओरंगुटान देखे और तुरंत वन अधिकारियों को सूचित किया। वन कर्मचारियों ने बिना नशा‑द्रव्य के इन बच्चों को सुरक्षित किया, जिससे उनके स्वास्थ्य पर कोई असर नहीं पड़ा।
इन ओरंगुटानों का भारत में स्वदेशी होना असंभव है, इसलिए वन विभाग ने अनुमान लगाया कि इन्हें किसी अंतर‑महाद्वीपीय तस्करी नेटवर्क द्वारा देश में लाया गया होगा। इस कारण वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) ने जांच शुरू कर दी है, ताकि तस्करी के स्रोत और संलग्न गिरोह की पहचान की जा सके।
जांच के तहत बचाए गए बच्चों के डीएनए और फॉरेन्सिक परीक्षण किए जाएंगे, जिससे उनके मूल देश की पुष्टि होगी और आगे के कानूनी कदम तय होंगे। इन ओरंगुटानों को अब एक वन्यजीव पुनर्वास केंद्र में भेजा गया है, जहाँ उन्हें चिकित्सकीय देखभाल और निगरानी मिलती रहेगी, तथा उनके पुनर्वास या पुनर्स्थापन के बारे में निर्णय लिया जाएगा।
यह घटना अंतर‑महाद्वीपीय वन्यजीव तस्करी के बढ़ते खतरे को उजागर करती है, जो विदेशी प्रजातियों को भारतीय जंगलों में लाती है। अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध वन्यजीव गतिविधि की तुरंत सूचना दें, ताकि भविष्य में ऐसी तस्करी को रोका जा सके और देश के प्राकृतिक तंत्र की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
इन ओरंगुटानों का भारत में स्वदेशी होना असंभव है, इसलिए वन विभाग ने अनुमान लगाया कि इन्हें किसी अंतर‑महाद्वीपीय तस्करी नेटवर्क द्वारा देश में लाया गया होगा। इस कारण वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) ने जांच शुरू कर दी है, ताकि तस्करी के स्रोत और संलग्न गिरोह की पहचान की जा सके।
जांच के तहत बचाए गए बच्चों के डीएनए और फॉरेन्सिक परीक्षण किए जाएंगे, जिससे उनके मूल देश की पुष्टि होगी और आगे के कानूनी कदम तय होंगे। इन ओरंगुटानों को अब एक वन्यजीव पुनर्वास केंद्र में भेजा गया है, जहाँ उन्हें चिकित्सकीय देखभाल और निगरानी मिलती रहेगी, तथा उनके पुनर्वास या पुनर्स्थापन के बारे में निर्णय लिया जाएगा।
यह घटना अंतर‑महाद्वीपीय वन्यजीव तस्करी के बढ़ते खतरे को उजागर करती है, जो विदेशी प्रजातियों को भारतीय जंगलों में लाती है। अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध वन्यजीव गतिविधि की तुरंत सूचना दें, ताकि भविष्य में ऐसी तस्करी को रोका जा सके और देश के प्राकृतिक तंत्र की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।