📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / ivanich
मनोरंजन
अंगह फिल्म समीक्षा: थेजा रियो ने नागालैंड में प्रगति व सांस्कृतिक क्षति पर प्रकाश डाला
✍️ India Today
🗓 29 अक्टू. 2026, 06:01 AM
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थेजा रियो की ‘अंगह’ फिल्म की समीक्षा में बताया गया है कि विकास से स्थानीय परम्पराओं पर क्या असर पड़ रहा है और सांस्कृतिक क्षति की चिंता जताई गई है।
थेजा रियो ने इंडिया टुडे के लिए लिखी गई समीक्षा में नागालैंड‑स्थित फिल्म ‘अंगह’ का विश्लेषण किया, जिसमें तेज़ विकास के साथ स्थानीय परम्पराओं के क्षीण होने की चिंता उजागर की गई है। रियो का मानना है कि बुनियादी ढाँचा और आर्थिक उन्नति से जीवन स्तर में सुधार हो सकता है, परन्तु इससे स्वदेशी भाषा और रीति‑रिवाजों पर दबाव बढ़ता है।
समीक्षा में बताया गया है कि फिल्म के निर्देशक ने नई सड़कों और स्कूलों को पारंपरिक जनजातीय अनुष्ठानों के साथ बारीकी से juxtapose किया है, जिससे एक ऐसा समुदाय दिखता है जो प्रगति और पहचान के बीच उलझा हुआ है। रियो ने फिल्म की संतुलित कथा की प्रशंसा की, जो न तो परम्पराओं को आदर्श बनाती है और न ही अंधाधुंध आधुनिकीकरण को बढ़ावा देती है।
रियो का निष्कर्ष है कि ‘अंगह’ एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक दस्तावेज़ के रूप में कार्य करती है, जो नीति निर्माताओं और दर्शकों को सतत विकास के रास्ते अपनाने की अपील करती है, जिससे नागालैंड की विरासत को संरक्षित रखा जा सके।
समीक्षा में बताया गया है कि फिल्म के निर्देशक ने नई सड़कों और स्कूलों को पारंपरिक जनजातीय अनुष्ठानों के साथ बारीकी से juxtapose किया है, जिससे एक ऐसा समुदाय दिखता है जो प्रगति और पहचान के बीच उलझा हुआ है। रियो ने फिल्म की संतुलित कथा की प्रशंसा की, जो न तो परम्पराओं को आदर्श बनाती है और न ही अंधाधुंध आधुनिकीकरण को बढ़ावा देती है।
रियो का निष्कर्ष है कि ‘अंगह’ एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक दस्तावेज़ के रूप में कार्य करती है, जो नीति निर्माताओं और दर्शकों को सतत विकास के रास्ते अपनाने की अपील करती है, जिससे नागालैंड की विरासत को संरक्षित रखा जा सके।