📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Finance of India
अपराध
आर वेरामणि और उनके सहयोगियों के खिलाफ पाँचवाँ पीओसीएसओ मामला दर्ज
✍️ The New Indian Express
🗓 04 अक्टू. 2026, 07:18 AM
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आर वेरामणि और उनके कुछ सहयोगियों के खिलाफ पाँचवाँ पीओसीएसओ मामला दर्ज किया गया है, नई इंडियन एक्सप्रेस ने बताया।
पुलिस ने आर वेरामणि और उनके कुछ सहयोगियों के खिलाफ बाल यौन शोषण रोकथाम (POCSO) अधिनियम के तहत पाँचवाँ मामला दर्ज किया है। नई इंडियन एक्सप्रेस ने बताया कि यह वही व्यक्ति से जुड़े अब तक के चार अलग‑अलग POCSO मामलों के बाद का नया आरोप है।
इस नवीनतम आरोपपत्र में 2012 के अधिनियम के तहत बाल शोषण के अतिरिक्त उल्लंघनों का उल्लेख है। यद्यपि आरोपों के विशिष्ट विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, पुलिस ने कहा कि जांच जारी है और अतिरिक्त साक्ष्य एकत्र किए गए हैं।
कानून विशेषज्ञों के अनुसार, एक ही व्यक्ति के खिलाफ कई POCSO मामलों में प्रत्येक दोषसिद्धि के लिए न्यूनतम तीन वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। आरोपियों को निकट भविष्य में अदालत में पेश होना पड़ेगा, जहाँ जमानत और अन्य प्रक्रिया संबंधी मुद्दों पर निर्णय लिया जाएगा।
पुलिस ने पीड़ितों की पहचान या आरोपों की प्रकृति के बारे में टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है, क्योंकि मामले की संवेदनशीलता और नाबालिगों की सुरक्षा को ध्यान में रखा गया है।
यह मामला बाल संरक्षण कानूनों के कड़ाई से पालन को दर्शाता है और संभावित अपराधियों को चेतावनी देने के उद्देश्य से कानून प्रवर्तन एजेंसियों की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
इस नवीनतम आरोपपत्र में 2012 के अधिनियम के तहत बाल शोषण के अतिरिक्त उल्लंघनों का उल्लेख है। यद्यपि आरोपों के विशिष्ट विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, पुलिस ने कहा कि जांच जारी है और अतिरिक्त साक्ष्य एकत्र किए गए हैं।
कानून विशेषज्ञों के अनुसार, एक ही व्यक्ति के खिलाफ कई POCSO मामलों में प्रत्येक दोषसिद्धि के लिए न्यूनतम तीन वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। आरोपियों को निकट भविष्य में अदालत में पेश होना पड़ेगा, जहाँ जमानत और अन्य प्रक्रिया संबंधी मुद्दों पर निर्णय लिया जाएगा।
पुलिस ने पीड़ितों की पहचान या आरोपों की प्रकृति के बारे में टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है, क्योंकि मामले की संवेदनशीलता और नाबालिगों की सुरक्षा को ध्यान में रखा गया है।
यह मामला बाल संरक्षण कानूनों के कड़ाई से पालन को दर्शाता है और संभावित अपराधियों को चेतावनी देने के उद्देश्य से कानून प्रवर्तन एजेंसियों की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।