📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Maywe46
अपराध
टीकमगढ़ जिला कोर्ट में ससुर‑दामाद के बीच लात‑घूँस का झड़प
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 03 सित. 2026, 04:02 PM
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टीकमगढ़ जिला न्यायालय में पारिवारिक मामले की सुनवाई के दौरान ससुर और दामाद के बीच लात‑घूँस का झड़प हुआ, जिसे वीडियो में दर्ज किया गया है, पर शिकायत न मिलने से पुलिस ने अभी तक कार्रवाई नहीं की।
मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिला न्यायालय में एक पारिवारिक मामले की सुनवाई के दौरान ससुर और दामाद के बीच लात‑घूँस का झड़प हुआ, जिससे कोर्ट की शांति बिगड़ गई। दोनों ने एक‑दूसरे पर किक और पंच मारते हुए कानूनी कार्यवाही को हिंसक मोड़ दिया।
घटना को उपस्थित लोगों ने कैमरे में कैद किया और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिससे कोर्ट में अनुशासन के उल्लंघन पर सवाल उठे। सुरक्षा कर्मियों ने हस्तक्षेप कर दोनों को अलग किया, परन्तु पहले कुछ देर तक झड़प जारी रही।
रिपोर्टों के अनुसार, विवाद बेटी से संबंधित मुद्दे पर उत्पन्न हुआ था, जो जल्द ही शारीरिक टकराव में बदल गया। हालांकि वीडियो व्यापक रूप से साझा किया गया, पुलिस ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की क्योंकि दोनों पक्षों में से किसी ने भी औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं करवाई है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार का व्यवहार न्यायालय के नियमों का उल्लंघन है और हिंसा तथा न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने वाले धारा के तहत दण्डनीय हो सकता है, परन्तु कार्रवाई के लिए शिकायत आवश्यक है।
अधिकारियों ने गवाहों से अपील की है कि वे यदि मामले की जांच चाहते हैं तो अपनी गवाही दें, क्योंकि न्यायालय की सुरक्षा और शिष्टाचार को व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर रखा जाना चाहिए।
घटना को उपस्थित लोगों ने कैमरे में कैद किया और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिससे कोर्ट में अनुशासन के उल्लंघन पर सवाल उठे। सुरक्षा कर्मियों ने हस्तक्षेप कर दोनों को अलग किया, परन्तु पहले कुछ देर तक झड़प जारी रही।
रिपोर्टों के अनुसार, विवाद बेटी से संबंधित मुद्दे पर उत्पन्न हुआ था, जो जल्द ही शारीरिक टकराव में बदल गया। हालांकि वीडियो व्यापक रूप से साझा किया गया, पुलिस ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की क्योंकि दोनों पक्षों में से किसी ने भी औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं करवाई है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार का व्यवहार न्यायालय के नियमों का उल्लंघन है और हिंसा तथा न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने वाले धारा के तहत दण्डनीय हो सकता है, परन्तु कार्रवाई के लिए शिकायत आवश्यक है।
अधिकारियों ने गवाहों से अपील की है कि वे यदि मामले की जांच चाहते हैं तो अपनी गवाही दें, क्योंकि न्यायालय की सुरक्षा और शिष्टाचार को व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर रखा जाना चाहिए।