📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ekta Parishad
कृषि
किसान संघ ने सरकार को दशहरे तक दिया अल्टीमेटम: बिजली, इनपुट व समर्थन मूल्य की माँगें
✍️ Amar Ujala · Bhopal
🗓 13 अक्टू. 2026, 02:31 PM
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किसान संघ ने कहा, यदि बिजली, खाद‑बीज, सिंचाई, समर्थन मूल्य और फसल नुकसान के मुआवजे की माँगें दशहरे तक पूरी नहीं हुईं तो प्रदेशभर में तीव्र आंदोलन होगा।
भारतीय किसान संघ ने केंद्र और राज्य सरकारों को अल्टीमेटम जारी किया, जिसमें दशहरे तक बिजली, इनपुट और मूल्य संबंधी माँगों को पूरा करने की मांग की गई है। संघ ने कहा कि यदि इस समय सीमा के भीतर समाधान नहीं हुआ तो प्रदेशभर में किसानों को जुटाया जाएगा।
मुख्य माँगों में सस्ती और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति, समय पर गुणवत्तापूर्ण खाद‑बीज की उपलब्धता, सिंचाई के लिए पानी की गारंटी और न्यूनतम समर्थन मूल्य में सुधार शामिल है। साथ ही, हालिया मौसम और बाजार की अस्थिरता से हुए फसल नुकसान के लिए मुआवजे की भी मांग की गई है।
संघ के प्रवक्ताओं ने बताया कि इन माँगों को पूरा न करने पर गैर‑हिंसक लेकिन सशक्त आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसमें सड़क अवरोध, जिला मुख्यालयों में रैलियां और बुवाई कार्यों का निलंबन शामिल हो सकता है। उन्होंने कहा कि आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा, परन्तु लगातार दबाव बनाकर सरकार को कार्रवाई के लिए मजबूर करेगा।
अब तक सरकार ने कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया है, परन्तु अल्टीमेटम ने वार्ता के लिए समय सीमा को संकीर्ण कर दिया है। पिछले समान अल्टीमेटम ने अक्सर नीति चर्चा को तेज किया है, विशेषकर जब बड़े किसान वर्ग शामिल होते हैं।
यह स्थिति कृषि संसाधनों और मूल्य स्थिरता के मुद्दों पर किसानों और नीति निर्माताओं के बीच बढ़ती टकराव को उजागर करती है, जो भारत के कृषि परिदृश्य में लगातार देखी जा रही प्रवृत्ति है।
मुख्य माँगों में सस्ती और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति, समय पर गुणवत्तापूर्ण खाद‑बीज की उपलब्धता, सिंचाई के लिए पानी की गारंटी और न्यूनतम समर्थन मूल्य में सुधार शामिल है। साथ ही, हालिया मौसम और बाजार की अस्थिरता से हुए फसल नुकसान के लिए मुआवजे की भी मांग की गई है।
संघ के प्रवक्ताओं ने बताया कि इन माँगों को पूरा न करने पर गैर‑हिंसक लेकिन सशक्त आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसमें सड़क अवरोध, जिला मुख्यालयों में रैलियां और बुवाई कार्यों का निलंबन शामिल हो सकता है। उन्होंने कहा कि आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा, परन्तु लगातार दबाव बनाकर सरकार को कार्रवाई के लिए मजबूर करेगा।
अब तक सरकार ने कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया है, परन्तु अल्टीमेटम ने वार्ता के लिए समय सीमा को संकीर्ण कर दिया है। पिछले समान अल्टीमेटम ने अक्सर नीति चर्चा को तेज किया है, विशेषकर जब बड़े किसान वर्ग शामिल होते हैं।
यह स्थिति कृषि संसाधनों और मूल्य स्थिरता के मुद्दों पर किसानों और नीति निर्माताओं के बीच बढ़ती टकराव को उजागर करती है, जो भारत के कृषि परिदृश्य में लगातार देखी जा रही प्रवृत्ति है।