Religion
फर्रुखाबाद में गणपति बप्पा मोरया के जयकारों के बीच गणेश प्रतिमाओं का शांतिपूर्ण भू‑विसर्जन
गणेश महोत्सव के समापन पर शहर‑देहात के विभिन्न क्षेत्रों से निकाली गई शोभायात्राओं में ध्वनि‑संगीत और ढोल‑नगाड़े के साथ प्रतिमाओं को पाँचाल घाट के जेसीबी गड्ढों में पर्यावरण‑सुरक्षित तरीके से विसर्जित किया गया।
फर्रुखाबाद में शुक्रवार को गणेश महोत्सव के समापन के अवसर पर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों से भव्य विसर्जन शोभायात्राएँ निकाली गईं। डीजे और ढोल‑नगाड़े की धुन पर झूमते हुए, गुलाल उड़ाते श्रद्धालुओं की भीड़ दोपहर बाद पाँचाल घाट पर पहुँची।
कटरा, बजरिया, तलैया फजल और छत्ता दलपत राय जैसे इलाकों से गाजे‑बाजे के साथ गणेश प्रतिमाओं को लेकर बड़ी संख्या में लोग घाट की ओर चले। प्रत्येक शोभायात्रा में स्थानीय सांस्कृतिक कार्यक्रम और जयकारें सुनाई दीं, जिससे माहौल उत्सवपूर्ण बना रहा।
पर्यावरण संरक्षण की पहल के तहत प्रशासन ने पाँचाल घाट के किनारे जेसीबी से खोदे गए बड़े गड्ढों में विधि‑विधान के अनुसार प्रतिमाओं का भू‑विसर्जन किया। इस प्रक्रिया से गंगा नदी को स्वच्छ रखने और जल प्रदूषण को रोकने का लक्ष्य रखा गया।
विसर्जन के दौरान पुलिस‑प्रशासन की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था बनी रही। सुरक्षा कर्मियों ने भीड़ नियंत्रण और शांति बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाई, जिससे कार्यक्रम बिना किसी बाधा के सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
विसर्जन के बाद उपस्थित श्रद्धालुओं ने भविष्य में भी इस प्रकार की पर्यावरण‑सुरक्षित विधियों को अपनाने की अपील की और गणेश बप्पा मोरया की जयकार के साथ कार्यक्रम का समापन किया।
कटरा, बजरिया, तलैया फजल और छत्ता दलपत राय जैसे इलाकों से गाजे‑बाजे के साथ गणेश प्रतिमाओं को लेकर बड़ी संख्या में लोग घाट की ओर चले। प्रत्येक शोभायात्रा में स्थानीय सांस्कृतिक कार्यक्रम और जयकारें सुनाई दीं, जिससे माहौल उत्सवपूर्ण बना रहा।
पर्यावरण संरक्षण की पहल के तहत प्रशासन ने पाँचाल घाट के किनारे जेसीबी से खोदे गए बड़े गड्ढों में विधि‑विधान के अनुसार प्रतिमाओं का भू‑विसर्जन किया। इस प्रक्रिया से गंगा नदी को स्वच्छ रखने और जल प्रदूषण को रोकने का लक्ष्य रखा गया।
विसर्जन के दौरान पुलिस‑प्रशासन की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था बनी रही। सुरक्षा कर्मियों ने भीड़ नियंत्रण और शांति बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाई, जिससे कार्यक्रम बिना किसी बाधा के सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
विसर्जन के बाद उपस्थित श्रद्धालुओं ने भविष्य में भी इस प्रकार की पर्यावरण‑सुरक्षित विधियों को अपनाने की अपील की और गणेश बप्पा मोरया की जयकार के साथ कार्यक्रम का समापन किया।