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फर्रूखाबाद: 29 साल पुराने गैंगस्टर केस में अनुपम दुबे को अंतिम बहस का आखिरी मौका
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फर्रूखाबाद की अदालत ने 29 साल पुराने गैंगस्टर मामले में जेल में बंद अनुपम दुबे को अंतिम बहस के लिए एक और अंतिम अवसर दिया है। अगली सुनवाई 1 अक्टूबर को होगी।
जनपद फर्रूखाबाद की अदालत ने 29 साल पुराने बहुचर्चित गैंगस्टर एक्ट के मामले में सख्त रुख अपनाया है। विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट/अपर सत्र न्यायाधीश ने जेल में बंद अभियुक्त अनुपम दुबे की ओर से अंतिम बहस पूरी न होने पर बचाव पक्ष को एक और अंतिम अवसर प्रदान किया है। इस मामले की अगली सुनवाई के लिए पत्रावली को 1 अक्टूबर की तारीख पर तय किया गया है।
मथुरा जेल में बंद अभियुक्त अनुपम दुबे को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष (ADGC) ने कोर्ट को अवगत कराया कि यह मामला वर्ष 1997 में कोतवाली फतेहगढ़ में दर्ज एफआईआर से संबंधित है। लंबे समय से अंतिम बहस लंबित रहने के कारण इसका शीघ्र निस्तारण आवश्यक है। यह भी बताया गया कि इस मामले में हाईकोर्ट में दाखिल याचिका भी खारिज हो चुकी है।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष द्वारा अस्वस्थता का हवाला देते हुए दूसरी तारीख की मांग की गई थी, जिसे अदालत ने निरस्त कर दिया। लंच के बाद भी बार-बार पुकारे जाने पर अधिवक्ता के उपस्थित न होने पर न्यायहित में एक आखिरी मौका दिया गया।
विशेष अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि 1 अक्टूबर को भी बचाव पक्ष के अधिवक्ता उपस्थित होकर तर्क प्रस्तुत नहीं करते हैं, तो बहस का अवसर समाप्त कर दिया जाएगा। इसके बाद पत्रावली को सीधे फैसले या आदेश के लिए सुरक्षित रख लिया जाएगा। 1 अक्टूबर को भी अनुपम दुबे मथुरा जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में उपस्थित रहेंगे।
मथुरा जेल में बंद अभियुक्त अनुपम दुबे को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष (ADGC) ने कोर्ट को अवगत कराया कि यह मामला वर्ष 1997 में कोतवाली फतेहगढ़ में दर्ज एफआईआर से संबंधित है। लंबे समय से अंतिम बहस लंबित रहने के कारण इसका शीघ्र निस्तारण आवश्यक है। यह भी बताया गया कि इस मामले में हाईकोर्ट में दाखिल याचिका भी खारिज हो चुकी है।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष द्वारा अस्वस्थता का हवाला देते हुए दूसरी तारीख की मांग की गई थी, जिसे अदालत ने निरस्त कर दिया। लंच के बाद भी बार-बार पुकारे जाने पर अधिवक्ता के उपस्थित न होने पर न्यायहित में एक आखिरी मौका दिया गया।
विशेष अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि 1 अक्टूबर को भी बचाव पक्ष के अधिवक्ता उपस्थित होकर तर्क प्रस्तुत नहीं करते हैं, तो बहस का अवसर समाप्त कर दिया जाएगा। इसके बाद पत्रावली को सीधे फैसले या आदेश के लिए सुरक्षित रख लिया जाएगा। 1 अक्टूबर को भी अनुपम दुबे मथुरा जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में उपस्थित रहेंगे।