📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Earth Science and Remote Sensing Unit, Lyndon B. J
विज्ञान
नेपाल बाढ़ के बाद अरुणाचल प्रदेश के खंग्री ग्लेशियरों का सर्वेक्षण करेगा विशेषज्ञ
✍️ Deccan Herald
🗓 30 अग. 2026, 09:48 PM
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नेपाल में बाढ़ के बाद, विशेषज्ञों ने अरुणाचल प्रदेश के खंग्री ग्लेशियरों का बाथिमेट्रिक सर्वेक्षण करने का फैसला किया है।
नेपाल में आई गंभीर बाढ़ ने हिमालय के निकट स्थित ग्लेशियरों की स्थिरता को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इस पर प्रतिक्रिया स्वरूप, भारतीय ग्लेशियोलॉजिस्ट, जलविज्ञानी और जलवायु वैज्ञानिकों का एक समूह अरुणाचल प्रदेश के ऊँचे हिमालय में स्थित खंग्री ग्लेशियर प्रणाली का बाथिमेट्रिक सर्वेक्षण करने का प्रस्ताव रखता है।
सर्वेक्षण में सोनार मैपिंग और रिमोट‑सेंसिंग तकनीकों का उपयोग करके बर्फ की मोटाई, उप‑ग्लेशियल जल मार्ग और पिघलते पानी की निकासी दर को मापा जाएगा। यह कार्य भारतीय रिमोट सेंसिंग संस्थान, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और राष्ट्रीय अंटार्कटिक एवं समुद्री अनुसंधान केंद्र के सहयोग से आयोजित किया जाएगा।
खंग्री ग्लेशियरों को पिछले दशक में तेज़ी से पीछे हटने के कारण संवेदनशील माना गया है। उनकी सतह के नीचे की स्थलाकृति का मानचित्रण संभावित बाढ़‑प्रवाहित घटनाओं की भविष्यवाणी में मदद करेगा, जिससे सियांग नदी के नीचे बसी जनसंख्या की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
फ़ील्ड कार्य अक्टूबर के शुरुआती सप्ताह में शुरू होने की योजना है, और प्रारंभिक परिणाम इस वर्ष के अंत तक आपदा प्रबंधन एजेंसियों के साथ साझा किए जाएंगे, जिससे क्षेत्र में चेतावनी प्रणाली को सुदृढ़ किया जा सके।
सर्वेक्षण में सोनार मैपिंग और रिमोट‑सेंसिंग तकनीकों का उपयोग करके बर्फ की मोटाई, उप‑ग्लेशियल जल मार्ग और पिघलते पानी की निकासी दर को मापा जाएगा। यह कार्य भारतीय रिमोट सेंसिंग संस्थान, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और राष्ट्रीय अंटार्कटिक एवं समुद्री अनुसंधान केंद्र के सहयोग से आयोजित किया जाएगा।
खंग्री ग्लेशियरों को पिछले दशक में तेज़ी से पीछे हटने के कारण संवेदनशील माना गया है। उनकी सतह के नीचे की स्थलाकृति का मानचित्रण संभावित बाढ़‑प्रवाहित घटनाओं की भविष्यवाणी में मदद करेगा, जिससे सियांग नदी के नीचे बसी जनसंख्या की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
फ़ील्ड कार्य अक्टूबर के शुरुआती सप्ताह में शुरू होने की योजना है, और प्रारंभिक परिणाम इस वर्ष के अंत तक आपदा प्रबंधन एजेंसियों के साथ साझा किए जाएंगे, जिससे क्षेत्र में चेतावनी प्रणाली को सुदृढ़ किया जा सके।