📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / SOMCCommunityRelations
बिज़नेस
विशेषज्ञों का कहना है, बैंकों और एनबीएफसी के सहयोग से भारत के विकास लक्ष्य
✍️ Fortune India
🗓 30 अक्टू. 2026, 09:38 AM
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विशेषज्ञों का मानना है कि बैंकों और एनबीएफसी के सहयोग से भारत के विकसित‑अर्थव्यवस्था लक्ष्य तेज़ी से हासिल होंगे।
फॉर्च्यून इंडिया द्वारा उद्धृत उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि नियोजित बैंकों और नॉन‑बैंक फाइनेंशियल कंपनियों (एनबीएफसी) के बीच समन्वित कार्यवाही भारत के दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक है। वे बताते हैं कि बैंकों के पास विशाल जमा आधार, विस्तृत शाखा नेटवर्क और सुदृढ़ नियामक ढांचा है, जबकि एनबीएफसी अधिक लचीलापन, विशिष्ट उत्पाद विशेषज्ञता और तेज़ क्रेडिट वितरण प्रदान करती हैं।
इन दोनों की पूरकता से बुनियादी ढाँचा, एमएसएमई और किफायती आवास जैसे क्षेत्रों में ऋण उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे सरकार की विकसित‑अर्थव्यवस्था बनने की आकांक्षा को बल मिलेगा। दोनों के सामंजस्य से वित्तीय समावेशन में सुधार और विकास‑महत्वपूर्ण परियोजनाओं में निजी पूँजी का प्रवाह तेज़ हो सकता है।
फिर भी विशेषज्ञों ने यह चेतावनी दी है कि प्रभावी सहयोग के लिए स्पष्ट नीति दिशा‑निर्देश, नियामक समन्वय और सुदृढ़ जोखिम‑प्रबंधन आवश्यक है, ताकि नियामक अंतर का फायदा न उठाया जा सके। वे RBI और अन्य नियामकों से अनुरोध करते हैं कि वे समान प्रतिस्पर्धी माहौल बनाते हुए बैंकों और एनबीएफसी की विशिष्ट भूमिकाओं को संरक्षित रखें।
संक्षेप में, विशेषज्ञों का सामूहिक निष्कर्ष यह है कि बैंकों और एनबीएफसी के बीच परस्पर सहयोग भारत के आर्थिक परिवर्तन को गति दे सकता है, बशर्ते निगरानी तंत्र इस विकसित साझेदारी के साथ तालमेल बिठा सके।
इन दोनों की पूरकता से बुनियादी ढाँचा, एमएसएमई और किफायती आवास जैसे क्षेत्रों में ऋण उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे सरकार की विकसित‑अर्थव्यवस्था बनने की आकांक्षा को बल मिलेगा। दोनों के सामंजस्य से वित्तीय समावेशन में सुधार और विकास‑महत्वपूर्ण परियोजनाओं में निजी पूँजी का प्रवाह तेज़ हो सकता है।
फिर भी विशेषज्ञों ने यह चेतावनी दी है कि प्रभावी सहयोग के लिए स्पष्ट नीति दिशा‑निर्देश, नियामक समन्वय और सुदृढ़ जोखिम‑प्रबंधन आवश्यक है, ताकि नियामक अंतर का फायदा न उठाया जा सके। वे RBI और अन्य नियामकों से अनुरोध करते हैं कि वे समान प्रतिस्पर्धी माहौल बनाते हुए बैंकों और एनबीएफसी की विशिष्ट भूमिकाओं को संरक्षित रखें।
संक्षेप में, विशेषज्ञों का सामूहिक निष्कर्ष यह है कि बैंकों और एनबीएफसी के बीच परस्पर सहयोग भारत के आर्थिक परिवर्तन को गति दे सकता है, बशर्ते निगरानी तंत्र इस विकसित साझेदारी के साथ तालमेल बिठा सके।