📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Government of India
स्वास्थ्य
राजस्थान के RGHS में अत्यधिक मेडिकल क्लेम: 238 रोगियों को कई बार जांच करवाई गई
✍️ Amar Ujala · Jaipur
🗓 22 अग. 2026, 07:28 AM
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राजस्थान सरकार के अस्पताल (RGHS) के डेटा विश्लेषण में एक महीने में 238 लाभार्थियों के 479 क्लेम सामने आए, जहाँ मरीजों को 3‑4 बार महँगी जांच करवाई गई।
राजस्थान सरकार के अस्पताल (RGHS) को एक हालिया डेटा विश्लेषण के बाद जांच के दायरे में लाया गया है, जिसमें एक महीने में 238 लाभार्थियों से जुड़े 479 अलग‑अलग क्लेम सामने आए। यह आंकड़ा दर्शाता है कि कई रोगियों को एक ही जांच के लिए कई बार अस्पताल में बुलाया गया।
RGHS की नीति के अनुसार दो हजार रुपये से अधिक लागत वाली किसी भी जांच के लिए प्री‑ऑथराइजेशन आवश्यक है। इस नियम से बचने के लिए जांच और क्लेम को अलग‑अलग किया गया, जिससे मरीजों को तीन‑चार बार वही जांच करानी पड़ी।
यह समस्या केवल एक ही अस्पताल तक सीमित नहीं रही; लगभग पचास अस्पतालों को इस क्लेम‑जनरेट करने वाले अभ्यास में शामिल पाया गया। स्वास्थ्य प्राधिकरण अब इन मामलों की विस्तृत जांच कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि क्लेम वैध हैं और रोगियों को अनावश्यक महँगी जांचों से बचाया जा सके।
यदि अनियमितताएँ पुष्टि होती हैं, तो प्री‑ऑथराइजेशन नियमों की कड़ी निगरानी और नियम तोड़ने वाले संस्थानों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की संभावना है, जिससे सार्वजनिक धन और रोगियों के हित की रक्षा होगी।
RGHS की नीति के अनुसार दो हजार रुपये से अधिक लागत वाली किसी भी जांच के लिए प्री‑ऑथराइजेशन आवश्यक है। इस नियम से बचने के लिए जांच और क्लेम को अलग‑अलग किया गया, जिससे मरीजों को तीन‑चार बार वही जांच करानी पड़ी।
यह समस्या केवल एक ही अस्पताल तक सीमित नहीं रही; लगभग पचास अस्पतालों को इस क्लेम‑जनरेट करने वाले अभ्यास में शामिल पाया गया। स्वास्थ्य प्राधिकरण अब इन मामलों की विस्तृत जांच कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि क्लेम वैध हैं और रोगियों को अनावश्यक महँगी जांचों से बचाया जा सके।
यदि अनियमितताएँ पुष्टि होती हैं, तो प्री‑ऑथराइजेशन नियमों की कड़ी निगरानी और नियम तोड़ने वाले संस्थानों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की संभावना है, जिससे सार्वजनिक धन और रोगियों के हित की रक्षा होगी।