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एटा: जिला अस्पताल और कचहरी में पार्किंग के नाम पर ₹20 की अवैध वसूली, जीएसटी के बिना काटी जा रही रसीदें
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एटा के वीरांगना अवंती बाई अस्पताल और कचहरी परिसर में दोपहिया वाहनों की पार्किंग के लिए ₹20 की वसूली की जा रही है, जिसमें जीएसटी नंबर और सरकारी मुहर वाली पर्चियां नहीं दी जा रही हैं।
एटा जिले के प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र वीरांगना अवंती बाई स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय (जिला अस्पताल) और कचहरी परिसर में आम जनता की जेब पर डाका डाला जा रहा है। अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों के तीमारदारों और कचहरी में अपने कानूनी कार्यों से पहुंचने वाले फरियादियों से दोपहिया वाहनों की पार्किंग के नाम पर ₹20 की जबरन वसूली की जा रही है।
हैरानी की बात यह है कि इस वसूली के एवज में दी जा रही पर्चियों पर न तो कोई जीएसटी (GST) नंबर दर्ज है और न ही दरों के निर्धारण से संबंधित कोई आधिकारिक सरकारी मुहर या दिशा-निर्देश दिखाई देते हैं। स्थानीय नागरिकों और पीड़ितों का कहना है कि जब इस अवैध वसूली का विरोध किया जाता है या उनसे रेट लिस्ट एवं जीएसटी पंजीकरण के बारे में सवाल पूछे जाते हैं, तो पार्किंगकर्मी संतोषजनक जवाब देने के बजाय उलझने पर उतारू हो जाते हैं।
कचहरी और तहसील परिसर में भी इसी तरह का ढर्रा देखने को मिल रहा है, जहां प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण और शहरवासी पहुंचते हैं। दूर-दराज से आने वाले लोगों से वाहन खड़ा करने के नाम पर बिना किसी नियम-कायदे के ₹20 प्रति दोपहिया वाहन वसूले जा रहे हैं। नागरिकों ने सवाल उठाए हैं कि दरों का निर्धारण किस आधार पर किया जा रहा है और क्या ठेकेदार अपनी मनमर्जी से दरें तय कर रहे हैं।
नागरिकों ने इस मामले में पारदर्शिता की कमी और कर चोरी की आशंका जताते हुए पार्किंग ठेकों की जांच कराने, आधिकारिक रेट लिस्ट का बोर्ड सार्वजनिक स्थान पर लगाने और बिना जीएसटी व मान्यता की पर्चियां काटकर हो रही अवैध वसूली पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
हैरानी की बात यह है कि इस वसूली के एवज में दी जा रही पर्चियों पर न तो कोई जीएसटी (GST) नंबर दर्ज है और न ही दरों के निर्धारण से संबंधित कोई आधिकारिक सरकारी मुहर या दिशा-निर्देश दिखाई देते हैं। स्थानीय नागरिकों और पीड़ितों का कहना है कि जब इस अवैध वसूली का विरोध किया जाता है या उनसे रेट लिस्ट एवं जीएसटी पंजीकरण के बारे में सवाल पूछे जाते हैं, तो पार्किंगकर्मी संतोषजनक जवाब देने के बजाय उलझने पर उतारू हो जाते हैं।
कचहरी और तहसील परिसर में भी इसी तरह का ढर्रा देखने को मिल रहा है, जहां प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण और शहरवासी पहुंचते हैं। दूर-दराज से आने वाले लोगों से वाहन खड़ा करने के नाम पर बिना किसी नियम-कायदे के ₹20 प्रति दोपहिया वाहन वसूले जा रहे हैं। नागरिकों ने सवाल उठाए हैं कि दरों का निर्धारण किस आधार पर किया जा रहा है और क्या ठेकेदार अपनी मनमर्जी से दरें तय कर रहे हैं।
नागरिकों ने इस मामले में पारदर्शिता की कमी और कर चोरी की आशंका जताते हुए पार्किंग ठेकों की जांच कराने, आधिकारिक रेट लिस्ट का बोर्ड सार्वजनिक स्थान पर लगाने और बिना जीएसटी व मान्यता की पर्चियां काटकर हो रही अवैध वसूली पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।