📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Michael Gäbler
राजनीति
ईपीएस ने टीवीके की कीमतों में बढ़ोतरी, बिजली कटौती और कानून व्यवस्था पर की तीखी आलोचना
✍️ The New Indian Express
🗓 20 सित. 2026, 08:16 AM
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ईपीएस ने टिवीके पर बढ़ती कीमतों, बार‑बार बिजली कटौती और तमिलनाडु में बिगड़ती कानून व्यवस्था को सुलझाने में नाकाम रहने का आरोप लगाया।
एक हालिया सार्वजनिक भाषण में, ईपीएस ने टिवीके को निशाना बनाते हुए कहा कि उन्होंने तमिलनाडु में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में तेज़ी को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। उन्होंने लगातार बिजली कटौतियों को भी उजागर किया, जो राज्य में दैनिक जीवन और व्यापार को बाधित कर रही हैं।
ईपीएस ने यह भी चेतावनी दी कि कानून‑और‑व्यवस्था की स्थिति बिगड़ रही है, अपराध और सार्वजनिक अशांति में वृद्धि हो रही है, और इन चुनौतियों को तुरंत न सुलझाने का आरोप टिवीके पर लगाया। यह टिप्पणी आर्थिक दबाव और सेवाओं में व्यवधान के कारण बढ़ती सार्वजनिक निराशा के बीच आई।
टिवीके की ओर से उस समय कोई प्रत्यक्ष प्रतिक्रिया नहीं मिली, पर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह टकराव आगामी चुनावों से पहले पार्टी के भीतर तनाव को बढ़ा सकता है। उठाए गए मुद्दे तमिलनाडु के निवासियों की किफ़ायती कीमतों, विश्वसनीय बिजली आपूर्ति और सुरक्षा संबंधी व्यापक चिंताओं को दर्शाते हैं।
राज्य के अधिकारियों ने आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं और बुनियादी ढाँचे की कमी को कारण बताते हुए इन समस्याओं को हल करने के लिए सुधारात्मक कदमों का वादा किया है। इस राजनीतिक बहस से इन प्रणालीगत समस्याओं को शीघ्रता से सुलझाने की आवश्यकता स्पष्ट होती है।
ईपीएस ने यह भी चेतावनी दी कि कानून‑और‑व्यवस्था की स्थिति बिगड़ रही है, अपराध और सार्वजनिक अशांति में वृद्धि हो रही है, और इन चुनौतियों को तुरंत न सुलझाने का आरोप टिवीके पर लगाया। यह टिप्पणी आर्थिक दबाव और सेवाओं में व्यवधान के कारण बढ़ती सार्वजनिक निराशा के बीच आई।
टिवीके की ओर से उस समय कोई प्रत्यक्ष प्रतिक्रिया नहीं मिली, पर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह टकराव आगामी चुनावों से पहले पार्टी के भीतर तनाव को बढ़ा सकता है। उठाए गए मुद्दे तमिलनाडु के निवासियों की किफ़ायती कीमतों, विश्वसनीय बिजली आपूर्ति और सुरक्षा संबंधी व्यापक चिंताओं को दर्शाते हैं।
राज्य के अधिकारियों ने आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं और बुनियादी ढाँचे की कमी को कारण बताते हुए इन समस्याओं को हल करने के लिए सुधारात्मक कदमों का वादा किया है। इस राजनीतिक बहस से इन प्रणालीगत समस्याओं को शीघ्रता से सुलझाने की आवश्यकता स्पष्ट होती है।