📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / শরদিন্দু ভট্টাচার্য্য
अपराध
ईओडब्ल्यू ने छिंदवाड़ा‑बालाघाट में पीडब्ल्यूडी इंजीनियर के घरों पर संपत्ति जांच के लिए छापा मारा
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 03 सित. 2026, 01:02 PM
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जबलपुर ईओडब्ल्यू ने गुरुवार सुबह छिंदवाड़ा और बालाघाट में पीडब्ल्यूडी के कार्यपालन यंत्री के.के. सिंगारे के घरों पर एक साथ छापा मारकर आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की जांच शुरू की।
जबलपुर ईओडब्ल्यू ने गुरुवार सुबह लगभग 5:45 बजे छिंदवाड़ा और बालाघाट में पीडब्ल्यूडी के कार्यपालन यंत्री के.के. सिंगारे के दो आधिकारिक आवासों पर एक साथ छापा मारा।
एजेंसी के बयान के अनुसार, यह कार्रवाई अधिकारी पर आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की जांच के तहत की गई है, जो मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत आती है। जांचकर्ताओं ने दस्तावेज़, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अधिकारी के नाम से जुड़े बैंक खातों के रिकॉर्ड जब्त किए।
साक्ष्य के छेड़छाड़ को रोकने के लिए दोनों स्थानों पर एक साथ छापा मारना तय किया गया। स्थानीय पुलिस ने ईओडब्ल्यू टीम को सहयोग दिया और परिसर एवं आस‑पास के क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित की। कोई प्रतिरोध नहीं दिखा और अभी तक अधिकारी को हिरासत में नहीं लिया गया।
संपत्ति के सटीक मूल्य का खुलासा नहीं किया गया, पर यह जांच राज्य में सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार को रोकने के व्यापक राष्ट्रीय प्रयास का हिस्सा है। आगे की जानकारी जांच के प्रगति के साथ जारी की जाएगी।
यह घटना मध्य प्रदेश में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, विशेषकर सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे के पदों में भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी‑करप्शन एजेंसियों की बढ़ती सतर्कता को उजागर करती है।
एजेंसी के बयान के अनुसार, यह कार्रवाई अधिकारी पर आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की जांच के तहत की गई है, जो मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत आती है। जांचकर्ताओं ने दस्तावेज़, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अधिकारी के नाम से जुड़े बैंक खातों के रिकॉर्ड जब्त किए।
साक्ष्य के छेड़छाड़ को रोकने के लिए दोनों स्थानों पर एक साथ छापा मारना तय किया गया। स्थानीय पुलिस ने ईओडब्ल्यू टीम को सहयोग दिया और परिसर एवं आस‑पास के क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित की। कोई प्रतिरोध नहीं दिखा और अभी तक अधिकारी को हिरासत में नहीं लिया गया।
संपत्ति के सटीक मूल्य का खुलासा नहीं किया गया, पर यह जांच राज्य में सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार को रोकने के व्यापक राष्ट्रीय प्रयास का हिस्सा है। आगे की जानकारी जांच के प्रगति के साथ जारी की जाएगी।
यह घटना मध्य प्रदेश में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, विशेषकर सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे के पदों में भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी‑करप्शन एजेंसियों की बढ़ती सतर्कता को उजागर करती है।