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21 Oct 2026•
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एम्स पटना में आयुष्मान कार्ड से किडनी सफल ट्रांसप्लांट

✍️ Reporter: Awanish Kumar 🗓 21 Oct 2026, 05:54 PM 👁 15
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पाटन एम्स में आयुष्मान भारत योजना पहला किडनी ट्रांसप्लांट किया गया

एम्स पटना से अवनीश कुमार कि रिपोर्ट

21 अक्टूबर, 2026

एम्स पटना में आयुष्मानके तहत भारत योजना के तहत पहला सफआयुष्मानल किडनी ट्रांसप्लांट

15वें किडनी ट्रांसप्लांट के बाद मरीज को अस्पताल से मिली छुट्टी

पटना, 21 अक्टूबर 2026
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), पटना ने किडनी प्रत्यारोपण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान में आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पहली बार सफल किडनी ट्रांसप्लांट किया गया। दरभंगा जिले के पचगछिया निवासी 31 वर्षीय मरीज को सफल प्रत्यारोपण के बाद आज अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। मरीज को उनकी 24 वर्षीय पत्नी ने अपनी किडनी दान की। यह एम्स पटना में किया गया 15वां किडनी ट्रांसप्लांट है।
यह उपलब्धि बिहार में आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को उन्नत चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से किडनी ट्रांसप्लांट जैसी महंगी चिकित्सा सुविधा का लाभ जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचने से उनके उपचार की राह आसान होगी।
इस अवसर पर एम्स पटना के निदेशक प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत कैशलेस किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा बिहार के गरीब एवं जरूरतमंद मरीजों के लिए वरदान साबित होगी। इससे आर्थिक कठिनाइयों के कारण किडनी ट्रांसप्लांट से वंचित रह जाने वाले मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि संस्थान की उन्नत चिकित्सा सेवाओं और जनकल्याणकारी स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी समन्वय का उदाहरण है।
एम्स पटना के नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) अमरेश कृष्ण ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत किडनी ट्रांसप्लांट कराने वाले मरीजों को प्रत्यारोपण के बाद एक वर्ष तक आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराने का भी प्रावधान है। इसके अतिरिक्त, प्रत्यारोपण के बाद उत्पन्न होने वाली संभावित जटिलताओं के उपचार की सुविधा भी योजना के अंतर्गत उपलब्ध है। इससे मरीजों को प्रत्यारोपण के बाद आवश्यक चिकित्सा देखभाल और उपचार प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।
यूरोलॉजी विभाग के अतिरिक्त प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. कमलेश गुंजन ने बताया कि इस किडनी ट्रांसप्लांट पर लगभग तीन लाख रुपये का खर्च आया। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत इस सुविधा की उपलब्धता से आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को किडनी प्रत्यारोपण जैसी जटिल और महंगी चिकित्सा सेवा प्राप्त करने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी।
इस अवसर पर एम्स पटना के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) प्रशांत कुमार सिंह, नेफ्रोलॉजी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मेघा सहगल, यूरोलॉजी विभाग के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. विपिन चंद्र, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. साकेत सिंह एवं डॉ. नवीन कुमार तथा एनेस्थीसिया विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) निशांत सहाय, प्रो. (डॉ.) अजीत कुमार, अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. अभ्युदय कुमार एवं डॉ. नीरज कुमार सहित अन्य चिकित्सक एवं स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित थे।
अस्पताल से छुट्टी मिलने पर मरीज ने एम्स पटना के निदेशक, संबंधित चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों तथा आयुष्मान भारत योजना के प्रति आभार व्यक्त किया। मरीज ने कहा कि इस योजना के माध्यम से उन्हें किडनी ट्रांसप्लांट जैसी जटिल और महंगी चिकित्सा सुविधा प्राप्त करने में महत्वपूर्ण सहायता मिली।
एम्स पटना में आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पहले किडनी ट्रांसप्लांट की सफलता से बिहार के जरूरतमंद मरीजों के लिए उन्नत किडनी उपचार एवं प्रत्यारोपण सेवाओं की उपलब्धता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यह उपलब्धि संस्थान की समर्पित चिकित्सा टीम और मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।
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