📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Samratudhd
राजनीति
बिहार में 7 लाख हटाव को लेकर सवालों के बीच चुनाव आयोग ने SIR पर स्पष्ट किया रुख
✍️ The Indian Express
🗓 28 सित. 2026, 12:16 AM
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चुनाव आयोग ने सोशल इंटरमीडिएरी रेगुलेशन्स (SIR) पर अपना रुख स्पष्ट किया, जबकि सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में 7 लाख हटाव को कोई सवाल नहीं उठा रहा है।
नई दिल्ली – चुनाव आयोग ने आज सोशल इंटरमीडिएरी रेगुलेशन्स (SIR) पर अपना रुख स्पष्ट किया, जो चुनाव के दौरान ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म को नियंत्रित करने वाले नियम हैं। यह स्पष्टिकरण बिहार में बड़े पैमाने पर सामग्री हटाने को लेकर उठे सवालों के बाद आया है।
बिहार के प्रमुख राजनेता सम्राट चौधरी ने आयोग के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्य में लगभग सात लाख पोस्ट या संदेशों के हटाव को अब तक किसी ने सवाल नहीं किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की अनदेखी लागू प्रक्रिया की पारदर्शिता पर संदेह पैदा करती है।
अधिकारियों ने कहा कि SIR के तहत कोई भी कार्रवाई उचित प्रक्रिया के अनुसार और चुनाव की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ही की जानी चाहिए। आयोग ने यह भी दोहराया कि वह सोशल मीडिया इंटरमीडिएटर्स की अनुपालन स्थिति की लगातार निगरानी करता रहेगा।
विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा गलत सूचना को रोकने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाने की चुनौती को उजागर करता है, विशेषकर बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों के संदर्भ में।
अधिकारियों ने अभी तक किसी नीति परिवर्तन की घोषणा नहीं की है, पर यह बयान सार्वजनिक चिंताओं को संबोधित करने और चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने की उनकी इच्छा को दर्शाता है।
बिहार के प्रमुख राजनेता सम्राट चौधरी ने आयोग के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्य में लगभग सात लाख पोस्ट या संदेशों के हटाव को अब तक किसी ने सवाल नहीं किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की अनदेखी लागू प्रक्रिया की पारदर्शिता पर संदेह पैदा करती है।
अधिकारियों ने कहा कि SIR के तहत कोई भी कार्रवाई उचित प्रक्रिया के अनुसार और चुनाव की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ही की जानी चाहिए। आयोग ने यह भी दोहराया कि वह सोशल मीडिया इंटरमीडिएटर्स की अनुपालन स्थिति की लगातार निगरानी करता रहेगा।
विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा गलत सूचना को रोकने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाने की चुनौती को उजागर करता है, विशेषकर बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों के संदर्भ में।
अधिकारियों ने अभी तक किसी नीति परिवर्तन की घोषणा नहीं की है, पर यह बयान सार्वजनिक चिंताओं को संबोधित करने और चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने की उनकी इच्छा को दर्शाता है।