📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / শরদিন্দু ভট্টাচার্য্য
अपराध
निलंबित आईएएस अधिकारी से जुड़ी 14.55 करोड़ की नकली टेंडर जाल में ईडी ने की कई तलाशी
✍️ Tripuratimes
🗓 06 नव. 2026, 09:06 AM
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ईडी ने तीन राज्यों में 13 स्थानों की तलाशी ली, निलंबित आईएएस अधिकारी से जुड़े 14.55 करोड़ रुपये के नकली टेंडर जाल से दस्तावेज़ जब्त किए।
एनफ़ोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) ने तीन राज्यों में फैले 13 स्थानों पर समन्वित तलाशी अभियान चलाया, जिससे 14.55 करोड़ रुपये के नकली टेंडर जाल का पर्दाफाश हुआ। जांच में पता चला है कि इस योजना को कई कंपनियों के माध्यम से बनायीं गई झूठी बोली के जरिए सरकारी अनुबंधों से सार्वजनिक धन चुराया गया।
जाँचकर्ता इस जाल को निलंबित आईएएस अधिकारी से जोड़ रहे हैं, जिनकी भागीदारी पर गहन जांच चल रही है। ईडी ने टेंडर आवेदन, वित्तीय रिकार्ड और पत्राचार सहित कई दस्तावेज़ जब्त किए, जो धन के प्रवाह को ट्रैक करने और सहयोगियों की पहचान करने में मदद करेंगे।
यह कार्रवाई सार्वजनिक खरीद में भ्रष्टाचार को रोकने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है, जहाँ अक्सर निजी लाभ के लिए प्रणाली का दुरुपयोग होता रहा है। संवेदनशीलता को देखते हुए, ईडी ने उन राज्यों या विशिष्ट स्थानों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो आरोपी को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम और संबंधित कानूनों के तहत आपराधिक मुकदमा का सामना करना पड़ेगा। निलंबित अधिकारी को सिविल सेवा बोर्ड से भी अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
ईडी ने जांच जारी रखने और सार्वजनिक संसाधनों के दुरुपयोग को कड़ी सजा दिलाने का संकल्प जताया है, ताकि सरकारी खरीद प्रक्रिया में भरोसा पुनः स्थापित हो सके।
जाँचकर्ता इस जाल को निलंबित आईएएस अधिकारी से जोड़ रहे हैं, जिनकी भागीदारी पर गहन जांच चल रही है। ईडी ने टेंडर आवेदन, वित्तीय रिकार्ड और पत्राचार सहित कई दस्तावेज़ जब्त किए, जो धन के प्रवाह को ट्रैक करने और सहयोगियों की पहचान करने में मदद करेंगे।
यह कार्रवाई सार्वजनिक खरीद में भ्रष्टाचार को रोकने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है, जहाँ अक्सर निजी लाभ के लिए प्रणाली का दुरुपयोग होता रहा है। संवेदनशीलता को देखते हुए, ईडी ने उन राज्यों या विशिष्ट स्थानों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो आरोपी को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम और संबंधित कानूनों के तहत आपराधिक मुकदमा का सामना करना पड़ेगा। निलंबित अधिकारी को सिविल सेवा बोर्ड से भी अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
ईडी ने जांच जारी रखने और सार्वजनिक संसाधनों के दुरुपयोग को कड़ी सजा दिलाने का संकल्प जताया है, ताकि सरकारी खरीद प्रक्रिया में भरोसा पुनः स्थापित हो सके।