📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / শরদিন্দু ভট্টাচার্য্য
अपराध
ईडी ने 30,000 करोड़ साइबर धोखाधड़ी केस में तीन और गिरफ्तार
✍️ Telangana Today
🗓 28 अग. 2026, 02:35 PM
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प्रवर्तन निदेशालय ने 30,000 करोड़ रुपये के साइबर धोखाधड़ी मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग जांच में तीन और संदिग्धों को हिरासत में लिया, अधिकारियों ने बताया।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बताया कि 30,000 करोड़ रुपये के साइबर धोखाधड़ी से जुड़े बड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तीन और व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई इस वर्ष की शुरुआत में वित्तीय अनियमितताओं की पहचान के बाद शुरू हुई जांच का हिस्सा है, जिसमें ऑनलाइन धोखाधड़ी योजनाओं का पता चला था।
ईडी के अधिकारियों के अनुसार, इन नए गिरफ्तार किए गए लोगों ने शैल कंपनियों और विदेशी खातों के माध्यम से अवैध धन के प्रवाह को सुगम बनाया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए, संदिग्धों के नाम और उनके विशिष्ट भूमिकाओं को सार्वजनिक नहीं किया गया है।
30,000 करोड़ रुपये की अनुमानित राशि उस धोखाधड़ी की कुल लागत को दर्शाती है, जिसमें उन्नत हैकिंग, डेटा में हेरफेर और डिजिटल भुगतान प्लेटफ़ॉर्म का दुरुपयोग शामिल है। ईडी ने बताया कि जांच के विस्तार के साथ और गिरफ्तारी और संपत्ति जप्त करने की संभावना है।
वित्तीय नियामकों और साइबर‑क्राइम इकाइयों के साथ समन्वय में, कानून प्रवर्तन एजेंसियां धन के प्रवाह का पता लगाने और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क को तोड़ने के लिए काम कर रही हैं। अभी तक कोई न्यायिक प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है, और संदिग्ध आगे की जांच के इंतजार में हिरासत में हैं।
यह मामला भारत में बड़े पैमाने पर साइबर धोखाधड़ी और डिजिटल वित्तीय अपराधों को ट्रैक करने में सामने आने वाली चुनौतियों को उजागर करता है।
ईडी के अधिकारियों के अनुसार, इन नए गिरफ्तार किए गए लोगों ने शैल कंपनियों और विदेशी खातों के माध्यम से अवैध धन के प्रवाह को सुगम बनाया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए, संदिग्धों के नाम और उनके विशिष्ट भूमिकाओं को सार्वजनिक नहीं किया गया है।
30,000 करोड़ रुपये की अनुमानित राशि उस धोखाधड़ी की कुल लागत को दर्शाती है, जिसमें उन्नत हैकिंग, डेटा में हेरफेर और डिजिटल भुगतान प्लेटफ़ॉर्म का दुरुपयोग शामिल है। ईडी ने बताया कि जांच के विस्तार के साथ और गिरफ्तारी और संपत्ति जप्त करने की संभावना है।
वित्तीय नियामकों और साइबर‑क्राइम इकाइयों के साथ समन्वय में, कानून प्रवर्तन एजेंसियां धन के प्रवाह का पता लगाने और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क को तोड़ने के लिए काम कर रही हैं। अभी तक कोई न्यायिक प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है, और संदिग्ध आगे की जांच के इंतजार में हिरासत में हैं।
यह मामला भारत में बड़े पैमाने पर साइबर धोखाधड़ी और डिजिटल वित्तीय अपराधों को ट्रैक करने में सामने आने वाली चुनौतियों को उजागर करता है।