📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ramesh Lalwani
राजनीति
ईसी ने बॉम्बे हाई कोर्ट को बताया: ड्राफ्ट SIR में नाम न होने का मतलब 'हटाना' नहीं
✍️ The Indian Express
🗓 14 अक्टू. 2026, 10:16 AM
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भारतीय निर्वाचन आयोग ने बॉम्बे हाई कोर्ट को स्पष्ट किया कि ड्राफ्ट स्टेट इनफॉर्मेशन रजिस्टर में नाम न आने का अर्थ यह नहीं कि उसे हटा दिया गया है।
भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने बॉम्बे हाई कोर्ट को ड्राफ्ट स्टेट इनफॉर्मेशन रजिस्टर (SIR) में नामों की स्थिति के संबंध में स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया है। आयोग ने कहा कि ड्राफ्ट दस्तावेज में किसी विशेष नाम के न आने का अर्थ यह नहीं है कि उस प्रविष्टि को 'हटा' दिया गया है।
यह कानूनी स्पष्टीकरण निर्वाचन रजिस्टर की पारदर्शिता और सटीकता के संदर्भ में उठाए गए चिंताओं को संबोधित करता है। ईसीआई ने तर्क दिया कि ड्राफ्ट चरण अस्थायी है और अंतिम रजिस्टर प्रकाशित होने से पहले इसमें आगे की जांच और आपत्ति प्रक्रिया का विषय है।
आयोग का यह बयान ड्राफ्ट SIR को वोटर्स या उम्मीदवारों के समावेश या अप्रतिषेप पर अंतिम निर्णय के रूप में गलतफहमी से बचाने के लिए है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि निर्वाचन रजिस्टर की तैयारी के दौरान प्रक्रियात्मक न्याय सुनिश्चित करने के लिए ऐसे स्पष्टीकरण मानक हैं।
बॉम्बे हाई कोर्ट वर्तमान में इस मामले की समीक्षा कर रहा है, और ईसीआई का यह प्रस्तुत किया गया बयान चालू न्यायिक प्रक्रियाओं में एक महत्वपूर्ण प्रमाण के रूप में काम करेगा। अंतिम परिणाम निर्वाचन कानूनों और आयोग की प्रक्रियात्मक दिशानिर्देशों के अदालत के व्याख्या पर निर्भर करेगा।
यह कानूनी स्पष्टीकरण निर्वाचन रजिस्टर की पारदर्शिता और सटीकता के संदर्भ में उठाए गए चिंताओं को संबोधित करता है। ईसीआई ने तर्क दिया कि ड्राफ्ट चरण अस्थायी है और अंतिम रजिस्टर प्रकाशित होने से पहले इसमें आगे की जांच और आपत्ति प्रक्रिया का विषय है।
आयोग का यह बयान ड्राफ्ट SIR को वोटर्स या उम्मीदवारों के समावेश या अप्रतिषेप पर अंतिम निर्णय के रूप में गलतफहमी से बचाने के लिए है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि निर्वाचन रजिस्टर की तैयारी के दौरान प्रक्रियात्मक न्याय सुनिश्चित करने के लिए ऐसे स्पष्टीकरण मानक हैं।
बॉम्बे हाई कोर्ट वर्तमान में इस मामले की समीक्षा कर रहा है, और ईसीआई का यह प्रस्तुत किया गया बयान चालू न्यायिक प्रक्रियाओं में एक महत्वपूर्ण प्रमाण के रूप में काम करेगा। अंतिम परिणाम निर्वाचन कानूनों और आयोग की प्रक्रियात्मक दिशानिर्देशों के अदालत के व्याख्या पर निर्भर करेगा।