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05 अक्टू. 2026•
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E10-E20 का खेल पेट्रोल तक सीमित, फिर डीजल में 10-20% एथेनॉल की चर्चा क्यों?

E10-E20 का खेल पेट्रोल तक सीमित, फिर डीजल में 10-20% एथेनॉल की चर्चा क्यों?

✍️ रिपोर्टर: ashif 🗓 05 अक्टू. 2026, 02:04 PM 👁 10
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डीजल में एथेनॉल की मिलावट को लेकर बड़ा सवाल!

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नई दिल्ली/अमेठी। पेट्रोल में E10 और E20 एथेनॉल मिश्रण को लेकर देशभर में चर्चा के बीच अब डीजल में एथेनॉल मिलाने को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। सबसे अहम बात यह है कि सामान्य HSD (डीजल) में पेट्रोल की तरह 10% या 20% एथेनॉल मिलाने की कोई मौजूदा राष्ट्रीय व्यवस्था नहीं है।
⛽ E10 और E20—डीजल के नहीं, पेट्रोल के मिश्रण हैं
E10 का मतलब 10 प्रतिशत एथेनॉल और 90 प्रतिशत पेट्रोल, जबकि E20 का मतलब 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल है। इनका इस्तेमाल पेट्रोल वाहनों के लिए किया जाता है। ऐसे में यदि कोई सामान्य डीजल को E10 या E20 बताकर पेश करता है, तो उपभोक्ताओं को सतर्क होकर वास्तविक ईंधन मिश्रण की जानकारी मांगनी चाहिए।
🔥 डीजल में क्या मिलाया जाता है?
भारत में डीजल के लिए बायोडीजल blending को बढ़ावा दिया जा रहा है और 2030 तक 5 प्रतिशत बायोडीजल मिश्रण का लक्ष्य रखा गया है। इसे एथेनॉल blending समझना गलत होगा।
⚠️ ED95 को लेकर भी भ्रम दूर होना जरूरी
ED95 नामक वैकल्पिक ईंधन व्यवस्था में लगभग 95% एथेनॉल और 5% डीजल का मिश्रण होता है। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि सामान्य पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले डीजल में 95% एथेनॉल मिलाया जा रहा है। यह विशेष प्रकार के उपयुक्त इंजनों/वाहनों के लिए वैकल्पिक ईंधन व्यवस्था है।
❓ सबसे बड़ा सवाल—अगर सामान्य डीजल में E10/E20 नहीं है तो पंप पर ऐसी चर्चा क्यों?
वाहन मालिकों और उपभोक्ताओं के लिए यह जानना जरूरी है कि उन्हें वास्तव में कौन-सा ईंधन दिया जा रहा है। डीजल की गुणवत्ता, मानक और blending को लेकर पारदर्शिता बेहद जरूरी है।
🚨 उपभोक्ताओं को सावधान रहने की जरूरत
यदि किसी पेट्रोल पंप पर डीजल को लेकर संदेह हो तो ग्राहक ईंधन की गुणवत्ता की जांच, density/quality test और संबंधित शिकायत व्यवस्था के बारे में जानकारी मांग सकते हैं।
🔥 सवाल सीधा है—डीजल के नाम पर वाहन मालिकों को आखिर क्या परोसा जा रहा है?
एथेनॉल, बायोडीजल और सामान्य HSD के बीच अंतर स्पष्ट करना पेट्रोल पंप संचालकों और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है। ईंधन में पारदर्शिता होगी तभी उपभोक्ता अपने वाहन के इंजन की सुरक्षा को लेकर निश्चिंत हो सकेंगे।
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