📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Khdibyajyoti
राजनीति
काचारियों को 'प्रवासी' कहने पर DSU ने Rio को किया निशाना, Dimapur की ऐतिहासिक जड़ें बताईं
✍️ Hub News
🗓 04 नव. 2026, 02:47 PM
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Dimasa Students' Union (DSU) ने Rio के उस बयान की कड़ी निंदा की जिसमें उन्होंने काचारियों को 'प्रवासी' कहा था। DSU का दावा है कि इस समुदाय की Dimapur में गहरी ऐतिहासिक जड़ें हैं।
Dimasa Students' Union (DSU) ने Rio के हालिया बयान की कड़ी निंदा की, जिसमें उन्होंने काचारी समुदाय को 'प्रवासी' (migrants) कहा था। छात्र संगठन ने इस वर्गीकरण पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह बयान उस समुदाय की क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही उपस्थिति को नजरअंदाज करता है।
अपने बयान में DSU ने Dimapur की ऐतिहासिक महत्वपूर्णता पर जोर दिया और दावा किया कि काचारी लोगों की संस्कृति और विरासत के साथ इस क्षेत्र से गहरी जड़ें हैं। संघ ने तर्क दिया कि यह समुदाय इस भूमि का मूल निवासी (indigenous) है और पीढ़ियों से स्थानीय सामाजिक ढांचे का अभिन्न अंग रहा है।
यह बयान उस नैरेटिव का खंडन करने के लिए था जो काचारियों को बाहरी लोगों के रूप में चित्रित करता है। DSU की यह प्रतिक्रिया क्षेत्र में विभिन्न जातीय समूहों के बीच पहचान और आसक्ति (belonging) से जुड़े चल रहे विवादों को उजागर करती है।
अपने बयान में DSU ने Dimapur की ऐतिहासिक महत्वपूर्णता पर जोर दिया और दावा किया कि काचारी लोगों की संस्कृति और विरासत के साथ इस क्षेत्र से गहरी जड़ें हैं। संघ ने तर्क दिया कि यह समुदाय इस भूमि का मूल निवासी (indigenous) है और पीढ़ियों से स्थानीय सामाजिक ढांचे का अभिन्न अंग रहा है।
यह बयान उस नैरेटिव का खंडन करने के लिए था जो काचारियों को बाहरी लोगों के रूप में चित्रित करता है। DSU की यह प्रतिक्रिया क्षेत्र में विभिन्न जातीय समूहों के बीच पहचान और आसक्ति (belonging) से जुड़े चल रहे विवादों को उजागर करती है।