📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Schüler1000
रक्षा
ड्रोन से पाकिस्तान से हथियार तस्करी, पंजाब बना ट्रांजिट हब
✍️ Amar Ujala · Jalandhar
🗓 23 अक्टू. 2026, 09:16 AM
👁 20
अधिकारियों का कहना है कि ड्रोन के जरिए पाकिस्तान सीमा से हथियार लाकर पंजाब के माध्यम से अन्य राज्यों तक पहुंचाए जा रहे हैं, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा है।
सुरक्षा एजेंसियों ने एक नया तस्करी मार्ग उजागर किया है, जिसमें ड्रोन के माध्यम से पाकिस्तान से हथियार भारत में लाए जा रहे हैं। ये हथियार पहले पंजाब में पहुँचते हैं, जहाँ स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं के माध्यम से अन्य राज्यों में वितरित किए जाते हैं, जिससे पारंपरिक जाँच बिंदुओं को बायपास किया जा रहा है।
जांचकर्ताओं का कहना है कि यह ऑपरेशन पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों की कमजोरियों का फायदा उठाता है, जहाँ कम ऊँचाई वाले ड्रोन को पारंपरिक रडार से पकड़ना कठिन है। हथियारों को स्थानीय मध्यस्थों को सौंपा जाता है, जिन्होंने क्षेत्र में विस्तृत नेटवर्क स्थापित कर दिया है, जिससे उत्तरी और मध्य भारत के मांग वाले केंद्रों तक तेज़ी से पहुँच संभव हो रही है।
रक्षा मंत्रालय ने ड्रोन‑आधारित तस्करी को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बढ़ता खतरा मानते हुए, राज्य पुलिस को सीमा पर निगरानी कड़ी करने का निर्देश दिया है। साथ ही, खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर इस अवैध व्यापार को समर्थन देने वाले वित्तीय और लॉजिस्टिक लिंक को ट्रैक करने का काम किया जा रहा है।
हथियारों की सटीक मात्रा अभी स्पष्ट नहीं है, पर इस खोज ने सीमा के संवेदनशील हिस्सों में एंटी‑ड्रोन तकनीक की तैनाती और हवाई निगरानी को सख्त करने की मांग को तेज़ कर दिया है।
जांचकर्ताओं का कहना है कि यह ऑपरेशन पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों की कमजोरियों का फायदा उठाता है, जहाँ कम ऊँचाई वाले ड्रोन को पारंपरिक रडार से पकड़ना कठिन है। हथियारों को स्थानीय मध्यस्थों को सौंपा जाता है, जिन्होंने क्षेत्र में विस्तृत नेटवर्क स्थापित कर दिया है, जिससे उत्तरी और मध्य भारत के मांग वाले केंद्रों तक तेज़ी से पहुँच संभव हो रही है।
रक्षा मंत्रालय ने ड्रोन‑आधारित तस्करी को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बढ़ता खतरा मानते हुए, राज्य पुलिस को सीमा पर निगरानी कड़ी करने का निर्देश दिया है। साथ ही, खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर इस अवैध व्यापार को समर्थन देने वाले वित्तीय और लॉजिस्टिक लिंक को ट्रैक करने का काम किया जा रहा है।
हथियारों की सटीक मात्रा अभी स्पष्ट नहीं है, पर इस खोज ने सीमा के संवेदनशील हिस्सों में एंटी‑ड्रोन तकनीक की तैनाती और हवाई निगरानी को सख्त करने की मांग को तेज़ कर दिया है।