📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Gallantry Awards
राजनीति
दिग्विजय सिंह ने उज्जैन से अयोध्या तक 1800 किमी पदयात्रा शुरू, चुनावी व्यवस्था पर सवाल
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 07 अक्टू. 2026, 04:00 PM
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सीनियर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने उज्जैन से अयोध्या तक 1800 किमी पदयात्रा शुरू की, जिसमें वे चुनावी पारदर्शिता, मतदाता अधिकार और RSS की भूमिका को उठाएंगे।
आज दिग्विजय सिंह ने उज्जैन, जिसे महाकाल नगरी के नाम से जाना जाता है, से अयोध्या तक लगभग 1,800 किलोमीटर की पदयात्रा का आरम्भ किया। यह यात्रा कई राज्यों में क्रमशः चलने वाली है, जिससे जनता के बीच सीधे संवाद स्थापित किया जा सके।
सिंह ने बताया कि इस पदयात्रा के माध्यम से वे चुनावी पारदर्शिता, ईवीएम की कार्यप्रणाली, मतदाता अधिकारों की सुरक्षा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की भूमिका जैसे मुद्दों को उठाएंगे।
यात्रा के दौरान विभिन्न ठहराव बिंदुओं पर भीड़ इकट्ठा होगी, जहाँ सिंह स्थानीय समस्याओं पर चर्चा करेंगे और जनमत को सुनेंगे। आयोजकों ने कहा कि यह पहल पार्टिसिपेंट्स के बीच गैर‑पार्टीभूत है, जिसका उद्देश्य आगामी चुनावों से पहले लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर सार्वजनिक बहस को प्रोत्साहित करना है।
मार्ग की पूरी जानकारी अभी तक नहीं दी गई है, परंतु सुरक्षा और लॉजिस्टिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों ने आवश्यक तैयारियां कर ली हैं।
यह कदम वरिष्ठ राजनेताओं द्वारा मतदाताओं से जुड़ने और प्रणालीगत समस्याओं को उजागर करने के लिए लंबे समय से अपनाए जाने वाले पदयात्रा मॉडल का हिस्सा है, जो भारतीय चुनावी परिदृश्य में प्रभावी सिद्ध हुआ है।
सिंह ने बताया कि इस पदयात्रा के माध्यम से वे चुनावी पारदर्शिता, ईवीएम की कार्यप्रणाली, मतदाता अधिकारों की सुरक्षा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की भूमिका जैसे मुद्दों को उठाएंगे।
यात्रा के दौरान विभिन्न ठहराव बिंदुओं पर भीड़ इकट्ठा होगी, जहाँ सिंह स्थानीय समस्याओं पर चर्चा करेंगे और जनमत को सुनेंगे। आयोजकों ने कहा कि यह पहल पार्टिसिपेंट्स के बीच गैर‑पार्टीभूत है, जिसका उद्देश्य आगामी चुनावों से पहले लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर सार्वजनिक बहस को प्रोत्साहित करना है।
मार्ग की पूरी जानकारी अभी तक नहीं दी गई है, परंतु सुरक्षा और लॉजिस्टिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों ने आवश्यक तैयारियां कर ली हैं।
यह कदम वरिष्ठ राजनेताओं द्वारा मतदाताओं से जुड़ने और प्रणालीगत समस्याओं को उजागर करने के लिए लंबे समय से अपनाए जाने वाले पदयात्रा मॉडल का हिस्सा है, जो भारतीय चुनावी परिदृश्य में प्रभावी सिद्ध हुआ है।