📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Anchal lilhare
धर्म
धनतेरस: महाकाल के दरबार में राष्ट्र कल्याण का दीप जलाया, अफसरों ने सभी की सुरक्षा की कामना
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 06 नव. 2026, 05:01 PM
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धनतेरस के अवसर पर उज्जैन के महाकाल मंदिर में राष्ट्र कल्याण का दीप प्रज्वलित किया गया, बाबा को अमृत अर्पित किया गया और अफसरों ने सभी की सुरक्षा की प्रार्थना की।
उज्जैन, मध्य प्रदेश – धनतेरस के पावन अवसर पर महाकालेश्वर ज्योतिर्ली में "राष्ट्र कल्याण" का विशेष दीप प्रज्वलित किया गया, जो राष्ट्र की भलाई का प्रतीक माना गया। यह अनुष्ठान मंदिर के पारम्परिक धनतेरस समारोह का हिस्सा है, जिसमें राज्य भर के भक्त भाग लेते हैं।
दीप प्रज्वलन के बाद, बाबा महाकाल को अमृत का अभिषेक किया गया, जिससे सभी पर दिव्य सुरक्षा की कामना की गई। इस अनुष्ठान में कई वरिष्ठ सरकारी अफसर भी उपस्थित रहे, जिन्होंने सांस्कृतिक सहभागिता के रूप में इस कार्यक्रम में भाग लिया।
अफसरों ने मिलकर सभी नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण की प्रार्थना की, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि धार्मिक स्थल सामाजिक एकजुटता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समारोह के अंत में उपस्थित जनसमूह को प्रसाद वितरित किया गया।
स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि कार्यक्रम में कोई व्यवधान नहीं आया और मंदिर प्रबंधन ने सभी कोविड‑संबंधी सुरक्षा उपायों का पालन किया।
महाकाल के दरबार में धनतेरस का यह आयोजन धार्मिक भावना और सार्वजनिक भावना के संगम को दर्शाता है, जो क्षेत्रीय सांस्कृतिक जीवन में मंदिर की महत्त्वपूर्ण भूमिका को उजागर करता है।
दीप प्रज्वलन के बाद, बाबा महाकाल को अमृत का अभिषेक किया गया, जिससे सभी पर दिव्य सुरक्षा की कामना की गई। इस अनुष्ठान में कई वरिष्ठ सरकारी अफसर भी उपस्थित रहे, जिन्होंने सांस्कृतिक सहभागिता के रूप में इस कार्यक्रम में भाग लिया।
अफसरों ने मिलकर सभी नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण की प्रार्थना की, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि धार्मिक स्थल सामाजिक एकजुटता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समारोह के अंत में उपस्थित जनसमूह को प्रसाद वितरित किया गया।
स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि कार्यक्रम में कोई व्यवधान नहीं आया और मंदिर प्रबंधन ने सभी कोविड‑संबंधी सुरक्षा उपायों का पालन किया।
महाकाल के दरबार में धनतेरस का यह आयोजन धार्मिक भावना और सार्वजनिक भावना के संगम को दर्शाता है, जो क्षेत्रीय सांस्कृतिक जीवन में मंदिर की महत्त्वपूर्ण भूमिका को उजागर करता है।