📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / ComparingQuantities
धर्म
देवास में डोल ग्यारस: 7.5 किलो नृसिंह पाषाण प्रतिमा को भमोरी नदी में तीन बार तैराया गया
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 22 सित. 2026, 11:00 PM
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हाटपिपल्या, देवास में 127 साल पुरानी डोल ग्यारस पर 7.5 किलो नृसिंह पाषाण प्रतिमा को भमोरी नदी में तीन बार तैराया गया, जिसे स्थानीय मान्यता में शुभ संकेत माना गया।
हाटपिपल्या, देवास के पास स्थित इस गाँव में वार्षिक डोल ग्यारस महोत्सव के दौरान 7.5 किलोग्राम वजन की नृसिंह पाषाण प्रतिमा को भमोरी नदी में तैराया गया। यह अनुष्ठान 127 साल पुरानी परम्परा का हिस्सा है, जिसमें प्रतिमा को पानी की सतह पर तीन बार क्रमशः रखा जाता है।
स्थानीय पुजारी और बुजुर्गों ने बताया कि यह तीन बार तैरना शुभ संकेत माना जाता है, जो देवता की कृपा और आने वाले वर्ष में समृद्धि का संकेत देता है। यह रीति पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है और हर बार गाँव वालों के बीच आध्यात्मिक जुड़ाव को मजबूत करती है।
हजारों श्रद्धालु नदी किनारे इकट्ठा हुए, मंत्रोच्चार और प्रार्थना के साथ प्रतिमा को पानी में देख रहे थे। नृसिंह, विष्णु के उग्र रूप, के प्रति गहरी भक्ति और इस अनुष्ठान के शुभ परिणामों की आशा ने भीड़ में उत्साह भर दिया।
भमोरी नदी, जो इस जिले के मध्य से बहती है, इस समारोह का प्राकृतिक मंच बन गई। नदी की शांत सतह ने देवता की उपस्थिति को प्रतीकात्मक रूप से प्रस्तुत किया, जबकि आयोजकों ने सुरक्षा के उपाय सुनिश्चित किए ताकि बड़ी भीड़ सुरक्षित रूप से अनुष्ठान देख सके।
तीन बार तैरने की प्रक्रिया सफलतापूर्वक समाप्त होने के बाद इस वर्ष का डोल ग्यारस समाप्त हुआ, और उपस्थित लोगों ने विश्वास के साथ घर लौटते हुए आशा जताई कि यह शुभ संकेत उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाएगा।
स्थानीय पुजारी और बुजुर्गों ने बताया कि यह तीन बार तैरना शुभ संकेत माना जाता है, जो देवता की कृपा और आने वाले वर्ष में समृद्धि का संकेत देता है। यह रीति पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है और हर बार गाँव वालों के बीच आध्यात्मिक जुड़ाव को मजबूत करती है।
हजारों श्रद्धालु नदी किनारे इकट्ठा हुए, मंत्रोच्चार और प्रार्थना के साथ प्रतिमा को पानी में देख रहे थे। नृसिंह, विष्णु के उग्र रूप, के प्रति गहरी भक्ति और इस अनुष्ठान के शुभ परिणामों की आशा ने भीड़ में उत्साह भर दिया।
भमोरी नदी, जो इस जिले के मध्य से बहती है, इस समारोह का प्राकृतिक मंच बन गई। नदी की शांत सतह ने देवता की उपस्थिति को प्रतीकात्मक रूप से प्रस्तुत किया, जबकि आयोजकों ने सुरक्षा के उपाय सुनिश्चित किए ताकि बड़ी भीड़ सुरक्षित रूप से अनुष्ठान देख सके।
तीन बार तैरने की प्रक्रिया सफलतापूर्वक समाप्त होने के बाद इस वर्ष का डोल ग्यारस समाप्त हुआ, और उपस्थित लोगों ने विश्वास के साथ घर लौटते हुए आशा जताई कि यह शुभ संकेत उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाएगा।