📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Cecil Dzwowa
स्वास्थ्य
डेंगी मामलों में वृद्धि, पपीता पत्ती उपचार पर वैज्ञानिक चेतावनी
✍️ bhaskarenglish.in
🗓 28 सित. 2026, 12:03 PM
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स्वास्थ्य अधिकारियों ने डेंगी बुखार की लगातार खतरे को उजागर किया और पपीता पत्ती उपचार की कोई सिद्ध प्रभावशीलता नहीं बताई।
भारत में डेंगी संक्रमण की संख्या फिर से बढ़ रही है, और विशेषज्ञों ने बताया कि यह रोग अब विभिन्न और कभी‑कभी असामान्य रूपों में प्रकट हो रहा है। परंपरागत रूप से बुखार, सिरदर्द और जोड़ों में दर्द से पहचाना जाने वाला डेंगी अब विस्तृत लक्षणों के साथ दिख रहा है, जिससे शुरुआती पहचान और उपचार कठिन हो रहा है।
सोशल मीडिया पर पपीता पत्ती के रस को डेंगी का घरेलू इलाज बताया जा रहा है, लेकिन चिकित्सा शोधकर्ता और स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस उपाय की कोई वैज्ञानिक प्रमाणित प्रभावशीलता नहीं है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने नागरिकों से कहा है कि वे मच्छर के प्रजनन स्थल को नष्ट करने और बुखार के शुरुआती लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने जैसे सिद्ध उपायों पर भरोसा करें। अनजाने में अवैध उपचार अपनाने से गंभीर देखभाल में देरी हो सकती है और रोग की स्थिति बिगड़ सकती है।
डेंगी के इस मौसमी प्रकोप ने सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों, मच्छर नियंत्रण पहलों और सामुदायिक जागरूकता की आवश्यकता को दोबारा उजागर किया है, ताकि देश भर में इस बीमारी के प्रसार को रोका जा सके।
सोशल मीडिया पर पपीता पत्ती के रस को डेंगी का घरेलू इलाज बताया जा रहा है, लेकिन चिकित्सा शोधकर्ता और स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस उपाय की कोई वैज्ञानिक प्रमाणित प्रभावशीलता नहीं है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने नागरिकों से कहा है कि वे मच्छर के प्रजनन स्थल को नष्ट करने और बुखार के शुरुआती लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने जैसे सिद्ध उपायों पर भरोसा करें। अनजाने में अवैध उपचार अपनाने से गंभीर देखभाल में देरी हो सकती है और रोग की स्थिति बिगड़ सकती है।
डेंगी के इस मौसमी प्रकोप ने सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों, मच्छर नियंत्रण पहलों और सामुदायिक जागरूकता की आवश्यकता को दोबारा उजागर किया है, ताकि देश भर में इस बीमारी के प्रसार को रोका जा सके।