📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Zuck28
अपराध
दिल्ली के तिहाड़ जेल में 1965 से चल रहे भागने के प्रयास, नई सुरक्षा उपाय
✍️ The Times of India
🗓 29 अक्टू. 2026, 02:01 PM
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1965 से तिहाड़ जेल में कैदी भागते रहे हैं, अब अधिकारियों ने नई निगरानी, बुनियादी ढाँचा और स्टाफ प्रशिक्षण से सुरक्षा को कड़ा किया है।
तिहाड़ जेल ने 1965 में दर्ज पहली भागने की घटना के बाद से कई बार कैदी भागते देखे हैं, जिससे सुरक्षा में खामियों की छाप बनी रही।
इन घटनाओं के बाद जेल प्रबंधन ने व्यापक सुधार शुरू किए हैं। अब हर सेल ब्लॉक में हाई‑डिफिनिशन सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, दीवारें और दरवाज़े सुदृढ़ किए गए हैं, और ब्लाइंड स्पॉट हटाने के लिए सेल डिज़ाइन बदला गया है। बायोमैट्रिक एक्सेस सिस्टम के माध्यम से स्टाफ और कैदियों की हर चाल पर नियंत्रण रखा जाता है, साथ ही गार्डों को नियमित ड्रिल और विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है।
अधिकारियों का कहना है कि इन उपायों के बाद पिछले साल कोई सफल भागना नहीं हुआ है। भविष्य में ड्रोन‑आधारित परिधि निगरानी और एआई‑आधारित विश्लेषण को जोड़कर सुरक्षा को और कड़ा करने की योजना है।
इन घटनाओं के बाद जेल प्रबंधन ने व्यापक सुधार शुरू किए हैं। अब हर सेल ब्लॉक में हाई‑डिफिनिशन सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, दीवारें और दरवाज़े सुदृढ़ किए गए हैं, और ब्लाइंड स्पॉट हटाने के लिए सेल डिज़ाइन बदला गया है। बायोमैट्रिक एक्सेस सिस्टम के माध्यम से स्टाफ और कैदियों की हर चाल पर नियंत्रण रखा जाता है, साथ ही गार्डों को नियमित ड्रिल और विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है।
अधिकारियों का कहना है कि इन उपायों के बाद पिछले साल कोई सफल भागना नहीं हुआ है। भविष्य में ड्रोन‑आधारित परिधि निगरानी और एआई‑आधारित विश्लेषण को जोड़कर सुरक्षा को और कड़ा करने की योजना है।