📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prami.ap90
मौसम
दिल्ली की वायु गुणवत्ता 2023 मॉनिटर्स पर ‘सीवियर’ दर्ज
✍️ Hindustan Times
🗓 06 नव. 2026, 04:32 PM
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2023 के वायु गुणवत्ता डेटा में दिल्ली की प्रदूषण स्तर को ‘सीवियर’ बताया गया, जिससे राजधानी में स्वास्थ्य चेतावनी जारी की गई।
2023 के वायु‑गुणवत्ता आँकड़ों के अनुसार दिल्ली की वायु प्रदूषण स्तर ‘सीवियर’ श्रेणी में दर्ज हुई है, जो राष्ट्रीय मॉनिटरिंग मानकों के अनुसार गंभीर स्वास्थ्य जोखिम दर्शाती है। इस वर्गीकरण में ए़क्यूआई मान उन सीमा से ऊपर होते हैं, जहाँ संवेदनशील समूहों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
यह मूल्यांकन केंद्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के निरंतर मॉनिटरिंग स्टेशन द्वारा एकत्रित डेटा पर आधारित है, जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में फैले हैं। पिछले वर्षों की तुलना में 2023 में कण पदार्थ (PM) की मात्रा में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई, जिससे शहर की वायु‑गुणवत्ता समस्या और स्पष्ट हुई।
स्वास्थ्य विभाग ने बच्चों, बुजुर्गों और श्वसन रोगियों को बाहर की गतिविधियों को सीमित करने और मास्क पहनने की चेतावनी जारी की है। सरकार ट्रैफ़िक प्रतिबंध और उच्च‑उत्सर्जन उद्योगों के अस्थायी बंद जैसे उपायों की समीक्षा कर रही है, ताकि वायु‑दुषण में और गिरावट न आए।
विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार ‘सीवियर’ स्तर से दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याएँ बढ़ सकती हैं और चिकित्सा सेवाओं पर दबाव पड़ सकता है, इसलिए राजधानी में वायु‑गुणवत्ता सुधार के लिए दीर्घकालिक रणनीतियों की आवश्यकता है।
यह मूल्यांकन केंद्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के निरंतर मॉनिटरिंग स्टेशन द्वारा एकत्रित डेटा पर आधारित है, जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में फैले हैं। पिछले वर्षों की तुलना में 2023 में कण पदार्थ (PM) की मात्रा में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई, जिससे शहर की वायु‑गुणवत्ता समस्या और स्पष्ट हुई।
स्वास्थ्य विभाग ने बच्चों, बुजुर्गों और श्वसन रोगियों को बाहर की गतिविधियों को सीमित करने और मास्क पहनने की चेतावनी जारी की है। सरकार ट्रैफ़िक प्रतिबंध और उच्च‑उत्सर्जन उद्योगों के अस्थायी बंद जैसे उपायों की समीक्षा कर रही है, ताकि वायु‑दुषण में और गिरावट न आए।
विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार ‘सीवियर’ स्तर से दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याएँ बढ़ सकती हैं और चिकित्सा सेवाओं पर दबाव पड़ सकता है, इसलिए राजधानी में वायु‑गुणवत्ता सुधार के लिए दीर्घकालिक रणनीतियों की आवश्यकता है।