📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Rohit2301
मौसम
दिल्ली‑एनसीआर में 1 नवंबर से नई सर्दियों की प्रदूषण रोकथाम, 50% वर्क‑फ्रॉम‑होम व पुरानी गाड़ियों पर प्रतिबंध
✍️ News24Online
🗓 01 नव. 2026, 11:35 AM
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1 नवंबर से दिल्ली‑एनसीआर में सर्दियों के प्रदूषण को कम करने के लिए नई कड़ियां लागू हुईं, जिसमें 50% कर्मचारियों को घर से काम करने और पुरानी गाड़ियों पर प्रतिबंध शामिल है।
दिल्ली‑एनसीआर ने 1 नवंबर से सर्दियों के प्रदूषण को कम करने के लिए नई कड़ियां लागू की हैं, क्योंकि इस समय धुंध और कणीय पदार्थों का स्तर आमतौर पर बढ़ जाता है। स्थानीय प्रशासन ने जारी आदेश में कहा है कि कार्यालय‑आधारित कर्मचारियों में से लगभग आधे को घर से काम करने की अनुमति दी जाएगी, जिससे यात्रा‑ट्रैफ़िक और उससे उत्पन्न उत्सर्जन में कमी आएगी।
वर्क‑फ्रॉम‑होम के साथ-साथ पुराने वाहन चलाने पर प्रतिबंध लगाया गया है; इन वाहनों को प्रदूषण के सबसे अधिक स्तर वाले दिनों में शहर की सड़कों पर चलने से रोका जाएगा। उम्र की सटीक सीमा स्पष्ट नहीं की गई है, पर यह कदम उन कारों और दोपहिया वाहनों को लक्षित करता है जो आधुनिक उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करते।
प्रशासन का कहना है कि कम ट्रैफ़िक और कम कार्यालय‑आधारित यात्रियों से महीन कणीय पदार्थों की मात्रा घटेगी, जिससे उन लोगों को राहत मिलेगी जो हर सर्दी श्वसन रोगों से जूझते हैं। ट्रैफ़िक पुलिस और पर्यावरण अधिकारी उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाएंगे।
नागरिकों से सार्वजनिक परिवहन, कार‑पूलिंग और पर्यावरण‑अनुकूल यात्रा विकल्प अपनाने का आग्रह किया गया है, क्योंकि सामूहिक प्रयास ही मौसमी वायु‑गुणवत्ता संकट को मात दे सकते हैं।
वर्क‑फ्रॉम‑होम के साथ-साथ पुराने वाहन चलाने पर प्रतिबंध लगाया गया है; इन वाहनों को प्रदूषण के सबसे अधिक स्तर वाले दिनों में शहर की सड़कों पर चलने से रोका जाएगा। उम्र की सटीक सीमा स्पष्ट नहीं की गई है, पर यह कदम उन कारों और दोपहिया वाहनों को लक्षित करता है जो आधुनिक उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करते।
प्रशासन का कहना है कि कम ट्रैफ़िक और कम कार्यालय‑आधारित यात्रियों से महीन कणीय पदार्थों की मात्रा घटेगी, जिससे उन लोगों को राहत मिलेगी जो हर सर्दी श्वसन रोगों से जूझते हैं। ट्रैफ़िक पुलिस और पर्यावरण अधिकारी उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाएंगे।
नागरिकों से सार्वजनिक परिवहन, कार‑पूलिंग और पर्यावरण‑अनुकूल यात्रा विकल्प अपनाने का आग्रह किया गया है, क्योंकि सामूहिक प्रयास ही मौसमी वायु‑गुणवत्ता संकट को मात दे सकते हैं।