📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Avrajyoti Mitra
देश
दिल्ली HC ने डीएनए परीक्षण आदेश को बरकरार रखा, सच जानने के अधिकार को सर्वोपरि बताया
✍️ Amar Ujala · Delhi
🗓 06 जुल. 2026, 07:31 AM
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दिल्ली हाईकोर्ट ने एक परिवार अदालत के उस आदेश को कायम रखा है जिसमें एक व्यक्ति और तीन बच्चों के डीएनए परीक्षण का निर्देश दिया गया था, यह रेखांकित करते हुए कि सामाजिक कलंक के कारण सच की पड़ताल को रोका नहीं जा सकता।
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक परिवार अदालत के उस आदेश को बरकरार रखा है जिसमें एक व्यक्ति और तीन बच्चों का डीएनए परीक्षण कराने का निर्देश दिया गया था। यह फैसला इस सिद्धांत को पुष्ट करता है कि सामाजिक कलंक के कारण सत्य की पड़ताल को नहीं रोका जा सकता और सच जानने का अधिकार सर्वोपरि है।
हाईकोर्ट का यह रुख परिवार अदालत के उस आदेश को मजबूत करता है जिसमें आनुवंशिक परीक्षण अनिवार्य किया गया है। यह निर्णय बताता है कि कानूनी मामलों में तथ्यात्मक सटीकता की खोज एक मौलिक अधिकार है, जिससे समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
इस न्यायिक घोषणा से यह स्पष्ट होता है कि अदालतें सामाजिक चिंताओं से ऊपर उठकर, संवेदनशील परिस्थितियों में भी तथ्यों को उजागर करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
हाईकोर्ट का यह रुख परिवार अदालत के उस आदेश को मजबूत करता है जिसमें आनुवंशिक परीक्षण अनिवार्य किया गया है। यह निर्णय बताता है कि कानूनी मामलों में तथ्यात्मक सटीकता की खोज एक मौलिक अधिकार है, जिससे समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
इस न्यायिक घोषणा से यह स्पष्ट होता है कि अदालतें सामाजिक चिंताओं से ऊपर उठकर, संवेदनशील परिस्थितियों में भी तथ्यों को उजागर करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।