📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Avrajyoti Mitra
शिक्षा
दिल्ली HC ने DU छात्र की रूस्टिकेशन को रोका, बिना सुनवाई के दंड को तानाशाही कहा
✍️ India Today
🗓 02 अक्टू. 2026, 04:15 AM
👁 11
दिल्ली हाई कोर्ट ने एक दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र की रूस्टिकेशन को अस्थायी रूप से रोक दिया, यह कहा कि बिना सुनवाई के दंड देना तानाशाही है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को एक दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र की रूस्टिकेशन को रोकने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि बिना सुनवाई के छात्र को निष्कासित करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है और यह तानाशाही कार्य है।
अदालत के आदेश के अनुसार, विश्वविद्यालय को किसी भी अनुशासनात्मक कार्रवाई को अंतिम रूप देने से पहले छात्र को सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य है। यह आदेश मूल मामले की सच्चाई पर टिप्पणी नहीं करता, बल्कि शैक्षणिक अनुशासन प्रक्रिया में आवश्यक प्रक्रिया संबंधी सुरक्षा पर बल देता है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला यह सुनिश्चित करता है कि शैक्षणिक संस्थानों को कठोर दंड जैसे रूस्टिकेशन लागू करने से पहले उचित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। आगे की सुनवाई में यह तय किया जाएगा कि उचित सुनवाई के बाद मूल दंड बरकरार रहेगा या नहीं।
दिल्ली हाई कोर्ट की इस हस्तक्षेप से छात्र अधिकारों की रक्षा और विश्वविद्यालय की अनुशासनात्मक प्रणाली को कानून के दायरे में रखने की आवश्यकता पर प्रकाश पड़ता है।
अदालत के आदेश के अनुसार, विश्वविद्यालय को किसी भी अनुशासनात्मक कार्रवाई को अंतिम रूप देने से पहले छात्र को सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य है। यह आदेश मूल मामले की सच्चाई पर टिप्पणी नहीं करता, बल्कि शैक्षणिक अनुशासन प्रक्रिया में आवश्यक प्रक्रिया संबंधी सुरक्षा पर बल देता है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला यह सुनिश्चित करता है कि शैक्षणिक संस्थानों को कठोर दंड जैसे रूस्टिकेशन लागू करने से पहले उचित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। आगे की सुनवाई में यह तय किया जाएगा कि उचित सुनवाई के बाद मूल दंड बरकरार रहेगा या नहीं।
दिल्ली हाई कोर्ट की इस हस्तक्षेप से छात्र अधिकारों की रक्षा और विश्वविद्यालय की अनुशासनात्मक प्रणाली को कानून के दायरे में रखने की आवश्यकता पर प्रकाश पड़ता है।