📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / AVATRAVA
जीवनशैली
दिल्ली फैशन वीक 2026 में भरत मंडपम पर हाथकरघा, खादी और उत्तरपूर्वी विरासत का जश्न
✍️ India's News.Net
🗓 02 सित. 2026, 03:39 PM
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दिल्ली फैशन वीक 2026 ने आईटीपीओ भरत मंडपम में भारतीय हाथकरघा, खादी और उत्तरपूर्वी संस्कृति को प्रमुखता देते हुए सफल समापन किया।
दिल्ली फैशन वीक 2026 का समापन आईटीपीओ भरत मंडपम में हुआ, जहाँ देश भर के डिजाइनर, बायर्स और मीडिया ने भाग लिया। आयोजकों ने इसे स्वदेशी वस्त्रों को प्रमुख रनवे पर पेश करने के एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में बताया।
कार्यक्रम के एक विशेष भाग में हाथकरघा और खादी को प्रमुखता दी गई, जहाँ पारम्परिक बुनाई तकनीकों को आधुनिक सिल्हूट के साथ मिलाया गया। डिजाइनरों ने उत्तरपूर्वी क्षेत्रों की रंग‑रूप, मोटिफ़ और शिल्प तकनीकों को भी प्रस्तुत किया, जिससे इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय मंच मिला।
उद्योग विशेषज्ञों ने कहा कि स्वदेशी वस्त्रों पर यह ज़ोर सरकार की हाथकरघा पुनरुज्जीवन और सतत फैशन को बढ़ावा देने की पहलों के साथ मेल खाता है। रिटेलर्स और फैशन संपादकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट होता है कि नैतिक रूप से निर्मित भारतीय वस्त्रों की मांग बढ़ रही है।
इवेंट का समापन दिल्ली फैशन वीक समिति के एक बयान के साथ हुआ, जिसमें स्थानीय कारीगरों को सशक्त बनाने और भविष्य के फैशन कथानकों में भारतीय विरासत को मुख्य आधार बनाने की प्रतिबद्धता को दोहराया गया।
कार्यक्रम के एक विशेष भाग में हाथकरघा और खादी को प्रमुखता दी गई, जहाँ पारम्परिक बुनाई तकनीकों को आधुनिक सिल्हूट के साथ मिलाया गया। डिजाइनरों ने उत्तरपूर्वी क्षेत्रों की रंग‑रूप, मोटिफ़ और शिल्प तकनीकों को भी प्रस्तुत किया, जिससे इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय मंच मिला।
उद्योग विशेषज्ञों ने कहा कि स्वदेशी वस्त्रों पर यह ज़ोर सरकार की हाथकरघा पुनरुज्जीवन और सतत फैशन को बढ़ावा देने की पहलों के साथ मेल खाता है। रिटेलर्स और फैशन संपादकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट होता है कि नैतिक रूप से निर्मित भारतीय वस्त्रों की मांग बढ़ रही है।
इवेंट का समापन दिल्ली फैशन वीक समिति के एक बयान के साथ हुआ, जिसमें स्थानीय कारीगरों को सशक्त बनाने और भविष्य के फैशन कथानकों में भारतीय विरासत को मुख्य आधार बनाने की प्रतिबद्धता को दोहराया गया।