📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Laurie Jones aka ljonesimages on Flickr
स्वास्थ्य
दिल्ली इमारत ध्वंस में शहीद बेटे के परिवार ने दान किया उसकी कॉर्निया
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🗓 08 सित. 2026, 09:41 AM
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दिल्ली में इमारत ध्वंस से युवा अर्जित की मृत्यु के बाद, उसके परिवार ने उसकी कॉर्निया दान करने का निर्णय लिया, जिससे दूसरों की दृष्टि सुधर सके।
दिल्ली में एक इमारत ध्वंस ने युवा अर्जित की जान ले ली, जिससे शहर में शोक की लहर दौड़ गई। इस दुखद घटना के बाद, अर्जित के माता‑पिता ने उसकी कॉर्निया दान करने का निर्णय लिया, ताकि उनका छोटा जीवन भी दूसरों को रोशनी दे सके।
परिवार ने अर्जित के शव की पुनर्प्राप्ति के बाद तुरंत स्थानीय नेत्र बैंक से संपर्क किया। चिकित्सकों ने पुष्टि की कि उसकी कॉर्निया प्रत्यारोपण के लिए उपयुक्त है और राष्ट्रीय दिशानिर्देशों के अनुसार दान प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया। अब नेत्र बैंक उन रोगियों से मिलाएगा जिन्हें कॉर्निया प्रत्यारोपण की आवश्यकता है।
स्वास्थ्य प्राधिकरणों ने अचानक हुई मौतों के बाद अंग‑और‑ऊतक दान के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्रत्येक कॉर्निया एक अंधे व्यक्ति की दृष्टि बहाल कर सकता है, जिससे जीवन में बड़ा परिवर्तन आ सकता है। रोगी अधिकार समूहों ने इस दान को आशा की किरण के रूप में सराहा है।
अर्जित के परिवार ने कहा कि उनका शोक अपार है, परंतु उसकी कॉर्निया दान करने से उन्हें कुछ सांत्वना मिली है। वे आशा करते हैं कि उनका यह कदम दूसरों को भी मृत्यु के बाद भी समाज को योगदान देने के लिए प्रेरित करेगा।
यह घटना शहरी सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य जागरूकता दोनों की चुनौतियों को उजागर करती है, जिससे निर्माण नियमों को कड़ा करने और देश भर में अंग‑दातव्य के प्रचार‑प्रसार की मांग बढ़ रही है।
परिवार ने अर्जित के शव की पुनर्प्राप्ति के बाद तुरंत स्थानीय नेत्र बैंक से संपर्क किया। चिकित्सकों ने पुष्टि की कि उसकी कॉर्निया प्रत्यारोपण के लिए उपयुक्त है और राष्ट्रीय दिशानिर्देशों के अनुसार दान प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया। अब नेत्र बैंक उन रोगियों से मिलाएगा जिन्हें कॉर्निया प्रत्यारोपण की आवश्यकता है।
स्वास्थ्य प्राधिकरणों ने अचानक हुई मौतों के बाद अंग‑और‑ऊतक दान के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्रत्येक कॉर्निया एक अंधे व्यक्ति की दृष्टि बहाल कर सकता है, जिससे जीवन में बड़ा परिवर्तन आ सकता है। रोगी अधिकार समूहों ने इस दान को आशा की किरण के रूप में सराहा है।
अर्जित के परिवार ने कहा कि उनका शोक अपार है, परंतु उसकी कॉर्निया दान करने से उन्हें कुछ सांत्वना मिली है। वे आशा करते हैं कि उनका यह कदम दूसरों को भी मृत्यु के बाद भी समाज को योगदान देने के लिए प्रेरित करेगा।
यह घटना शहरी सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य जागरूकता दोनों की चुनौतियों को उजागर करती है, जिससे निर्माण नियमों को कड़ा करने और देश भर में अंग‑दातव्य के प्रचार‑प्रसार की मांग बढ़ रही है।