📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Anirudh Giri
राजनीति
जाखर के बयान पर दिल्ली एएपी नेताओं ने पंजाब मंत्रियों के घरों पर कब्जा किया
✍️ The Times of India
🗓 30 सित. 2026, 12:17 PM
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दिल्ली के एएपी नेताओं ने पंजाब के मंत्रियों के घरों पर कब्जा कर लिया, ऐसा दावा सीनियर राजनेता सुखबीर सिंह जाखर ने किया।
सिनियर पंजाब राजनेता सुखबीर सिंह जाखर ने आरोप लगाया है कि दिल्ली के आम आदमी पार्टी (एएपी) के नेताओं ने कई पंजाब मंत्रियों के आधिकारिक आवासों में प्रवेश कर उन्हें कब्जे में ले लिया है। यह बयान मीडिया को जारी किए गए एक बयान में दिया गया, जिसमें जाखर ने इस कदम को राज्य सरकार के लिए सीधा चुनौती बताया।
उनके अनुसार, एएपी के नेताओं ने बिना किसी अनुमति के इन घरों में प्रवेश किया और अस्थायी व्यवस्था स्थापित की, जिससे सुरक्षा और राजनीतिक शिष्टाचार को लेकर चिंताएँ उत्पन्न हुई हैं। प्रभावित मंत्रियों ने इस घटना पर अभी तक कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है, और कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने भी कोई आधिकारिक शिकायत की पुष्टि नहीं की है।
यह घटना एएपी के दिल्ली और पंजाब शाखाओं के बीच बढ़ती राजनीतिक तनाव के बीच आई है, जहाँ दोनों पक्ष एक-दूसरे पर पार्टी की एकता को कमजोर करने का आरोप लगा रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के आंतरिक विवाद दोनों क्षेत्रों में आगामी चुनावी रणनीतियों को प्रभावित कर सकते हैं।
कब्जे में आए घरों की संख्या या शामिल नेताओं की पहचान अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है। स्थिति को राजनीतिक विश्लेषकों और स्थानीय प्राधिकरणों द्वारा करीबी नज़र से देखा जा रहा है।
उनके अनुसार, एएपी के नेताओं ने बिना किसी अनुमति के इन घरों में प्रवेश किया और अस्थायी व्यवस्था स्थापित की, जिससे सुरक्षा और राजनीतिक शिष्टाचार को लेकर चिंताएँ उत्पन्न हुई हैं। प्रभावित मंत्रियों ने इस घटना पर अभी तक कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है, और कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने भी कोई आधिकारिक शिकायत की पुष्टि नहीं की है।
यह घटना एएपी के दिल्ली और पंजाब शाखाओं के बीच बढ़ती राजनीतिक तनाव के बीच आई है, जहाँ दोनों पक्ष एक-दूसरे पर पार्टी की एकता को कमजोर करने का आरोप लगा रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के आंतरिक विवाद दोनों क्षेत्रों में आगामी चुनावी रणनीतियों को प्रभावित कर सकते हैं।
कब्जे में आए घरों की संख्या या शामिल नेताओं की पहचान अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है। स्थिति को राजनीतिक विश्लेषकों और स्थानीय प्राधिकरणों द्वारा करीबी नज़र से देखा जा रहा है।