📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Janabaevazizbek
राजनीति
गया में डीड राइटरों का पेपरलेस रजिस्ट्री विरोध तेज, कांग्रेस का समर्थन
✍️ Amar Ujala · Gaya
🗓 25 अग. 2026, 04:37 PM
👁 4
गया में डीड राइटरों ने मंगलवार को पेपरलेस रजिस्ट्री के खिलाफ विरोध तेज किया, व्यवस्था वापस करने की माँग की और अदालत जाने की चेतावनी दी, कांग्रेस ने समर्थन जताया।
गया, बिहार – मंगलवार को डीड राइटरों ने जिला रजिस्ट्री कार्यालय के बाहर एक तीव्र सिट‑इन किया, जो इस सप्ताह की शुरुआत में शुरू हुआ था, ताकि राज्य द्वारा लागू किए गए पेपरलेस रजिस्ट्री प्रणाली के खिलाफ विरोध किया जा सके। पेन और हस्तलिखित याचिकाओं से लैस यह समूह पारंपरिक भूमि‑रिकॉर्ड प्रक्रियाओं को खतरे में मानता है।
समूह ने सरकार को एक औपचारिक नोटिस जारी किया, जिसमें पेपरलेस रजिस्ट्री को तुरंत वापस लेने की माँग की गई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे इस नीति की वैधता और भूमि‑रिकॉर्ड की सटीकता पर सवाल उठाने के लिए अदालत में याचिका दायर करेंगे।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इस आंदोलन का समर्थन किया और स्थानीय हितधारकों की शिकायतों के साथ खड़े होने का इरादा जताया। क्षेत्रीय कांग्रेस प्रतिनिधियों ने डीड राइटरों के पक्ष में आवाज़ उठाते हुए प्रशासन से संवाद की माँग की।
पेपरलेस रजिस्ट्री, जिसे बिहार सरकार ने भूमि‑रिकॉर्ड को डिजिटल बनाकर प्रक्रिया को तेज करने के लिए पेश किया था, को कुछ कानूनी और लेखा‑पुस्तक कर्मचारियों ने आलोचना की है। उनका तर्क है कि डिजिटल उपकरणों से अपरिचित लोग इस बदलाव से बाहर हो सकते हैं और इससे दस्तावेज़ी त्रुटियों की संभावना बढ़ सकती है।
अब तक सरकार ने विरोधियों की मांगों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, और यह स्थिति शाम तक जारी रहने की संभावना है।
समूह ने सरकार को एक औपचारिक नोटिस जारी किया, जिसमें पेपरलेस रजिस्ट्री को तुरंत वापस लेने की माँग की गई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे इस नीति की वैधता और भूमि‑रिकॉर्ड की सटीकता पर सवाल उठाने के लिए अदालत में याचिका दायर करेंगे।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इस आंदोलन का समर्थन किया और स्थानीय हितधारकों की शिकायतों के साथ खड़े होने का इरादा जताया। क्षेत्रीय कांग्रेस प्रतिनिधियों ने डीड राइटरों के पक्ष में आवाज़ उठाते हुए प्रशासन से संवाद की माँग की।
पेपरलेस रजिस्ट्री, जिसे बिहार सरकार ने भूमि‑रिकॉर्ड को डिजिटल बनाकर प्रक्रिया को तेज करने के लिए पेश किया था, को कुछ कानूनी और लेखा‑पुस्तक कर्मचारियों ने आलोचना की है। उनका तर्क है कि डिजिटल उपकरणों से अपरिचित लोग इस बदलाव से बाहर हो सकते हैं और इससे दस्तावेज़ी त्रुटियों की संभावना बढ़ सकती है।
अब तक सरकार ने विरोधियों की मांगों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, और यह स्थिति शाम तक जारी रहने की संभावना है।