Religion
डिचोली: गोवा के नार्वे गांव स्थित पवित्र पंचगंगा नदी तीर्थस्थल पर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर पारंपरिक अष्टमी जत्रा बड़े उत्साह और भक्ति
पंचगंगा नदी में वालवंटी, खांडपेार, कुडाली, म्हादई और मांडवी नदियों का संगम माना जाता है। इस पवित्र संगम पर श्रद्धालु स्नान करने के बाद श्रीकृष्ण, देव कळोबा सहित विभिन्न देवी-देवताओ
डिचोली: गोवा के नार्वे गांव स्थित पवित्र पंचगंगा नदी तीर्थस्थल पर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर पारंपरिक अष्टमी जत्रा बड़े उत्साह और भक्तिभाव के साथ मनाई गई। इस अवसर पर गोवा के विभिन्न हिस्सों से हजारों श्रद्धालु नार्वे पहुंचे। भक्तों ने पंचगंगा संगम में पवित्र स्नान कर देवी-देवताओं के दर्शन किए और आशीर्वाद प्राप्त किया।
पंचगंगा नदी में वालवंटी, खांडपेार, कुडाली, म्हादई और मांडवी नदियों का संगम माना जाता है। इस पवित्र संगम पर श्रद्धालु स्नान करने के बाद श्रीकृष्ण, देव कळोबा सहित विभिन्न देवी-देवताओं के दर्शन करते हैं। इस अवसर पर शांतादुर्गा, चामुंडा, महालक्ष्मी और कपिलेश्वरी सहित विभिन्न देवी-देवताओं की पालखियां भी तीर्थस्थल पर पहुंचीं।
गोवा के मुख्यमंत्री तथा स्थानीय विधायक ने भी पवित्र तीर्थक्षेत्र का दौरा कर पारंपरिक अभिषेक और पूजा-अर्चना की। अष्टमी के दिन पूरे गोवा से बड़ी संख्या में श्रद्धालु नार्वे पहुंचते हैं और श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
अष्टमी जत्रा का प्रमुख आकर्षण यहां लगने वाली पारंपरिक फेरी है। फेरी में लकड़ी के पाट, चौपाई तथा अन्य पारंपरिक वस्तुओं के साथ खाजे, चने और विभिन्न खाद्य पदार्थों के स्टॉल लगाए जाते हैं। जत्रा में उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए गोवा सरकार की ओर से विशेष परिवहन व्यवस्था भी की जाती है।
नार्वे की यह पारंपरिक अष्टमी जत्रा गोवा की धार्मिक आस्था, लोकपरंपरा और सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम मानी जाती है।
पंचगंगा नदी में वालवंटी, खांडपेार, कुडाली, म्हादई और मांडवी नदियों का संगम माना जाता है। इस पवित्र संगम पर श्रद्धालु स्नान करने के बाद श्रीकृष्ण, देव कळोबा सहित विभिन्न देवी-देवताओं के दर्शन करते हैं। इस अवसर पर शांतादुर्गा, चामुंडा, महालक्ष्मी और कपिलेश्वरी सहित विभिन्न देवी-देवताओं की पालखियां भी तीर्थस्थल पर पहुंचीं।
गोवा के मुख्यमंत्री तथा स्थानीय विधायक ने भी पवित्र तीर्थक्षेत्र का दौरा कर पारंपरिक अभिषेक और पूजा-अर्चना की। अष्टमी के दिन पूरे गोवा से बड़ी संख्या में श्रद्धालु नार्वे पहुंचते हैं और श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
अष्टमी जत्रा का प्रमुख आकर्षण यहां लगने वाली पारंपरिक फेरी है। फेरी में लकड़ी के पाट, चौपाई तथा अन्य पारंपरिक वस्तुओं के साथ खाजे, चने और विभिन्न खाद्य पदार्थों के स्टॉल लगाए जाते हैं। जत्रा में उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए गोवा सरकार की ओर से विशेष परिवहन व्यवस्था भी की जाती है।
नार्वे की यह पारंपरिक अष्टमी जत्रा गोवा की धार्मिक आस्था, लोकपरंपरा और सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम मानी जाती है।