📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Defence
विज्ञान
सीएसआईआर‑एनआईओ वैज्ञानिक विषैले समुद्री जीवों से नई दवाओं की खोज में
✍️ The Times of India
🗓 25 अग. 2026, 08:37 AM
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सीएसआईआर राष्ट्रीय महासागर संस्थान के शोधकर्ता विषैले समुद्री जीवों के विष का विश्लेषण कर रहे हैं ताकि संभावित चिकित्सीय यौगिकों की खोज की जा सके।
सीएसआईआर राष्ट्रीय महासागर संस्थान (एनआईओ) के शोधकर्ता गोवा में विषैले समुद्री जीवों, जैसे समुद्री सांप, कॉन स्नेल और कुछ जेलीफ़िश प्रजातियों के विषों का विस्तृत अध्ययन कर रहे हैं। इन विषों से संभावित चिकित्सीय यौगिकों को अलग करने का उद्देश्य है।
टीम उन्नत बायोकेमिकल और जीनोमिक तकनीकों का उपयोग कर विषों की संरचना और उनके फार्माकोलॉजिकल गुणों का मानचित्रण कर रही है। प्रारंभिक विश्लेषण में कई यौगिकों की पहचान हुई है जो पुरानी दर्द, कैंसर कोशिकाओं और बैक्टीरियल संक्रमणों के उपचार में उपयोगी हो सकते हैं।
"समुद्री विष एक अनछुआ स्रोत है," एनआईओ के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. आर. एस. पटेल ने कहा। "इनकी क्रिया विधि को समझकर हम अधिक सुरक्षित और प्रभावी दवाएँ विकसित करने की आशा रखते हैं।"
यह शोध भारत के समुद्री जैव विविधता को चिकित्सा नवाचार के लिए उपयोग करने के व्यापक राष्ट्रीय प्रयास का हिस्सा है। इस अध्ययन के परिणाम इस वर्ष के अंत में किसी पीयर‑रिव्यू जर्नल में प्रकाशित होने की उम्मीद है।
टीम उन्नत बायोकेमिकल और जीनोमिक तकनीकों का उपयोग कर विषों की संरचना और उनके फार्माकोलॉजिकल गुणों का मानचित्रण कर रही है। प्रारंभिक विश्लेषण में कई यौगिकों की पहचान हुई है जो पुरानी दर्द, कैंसर कोशिकाओं और बैक्टीरियल संक्रमणों के उपचार में उपयोगी हो सकते हैं।
"समुद्री विष एक अनछुआ स्रोत है," एनआईओ के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. आर. एस. पटेल ने कहा। "इनकी क्रिया विधि को समझकर हम अधिक सुरक्षित और प्रभावी दवाएँ विकसित करने की आशा रखते हैं।"
यह शोध भारत के समुद्री जैव विविधता को चिकित्सा नवाचार के लिए उपयोग करने के व्यापक राष्ट्रीय प्रयास का हिस्सा है। इस अध्ययन के परिणाम इस वर्ष के अंत में किसी पीयर‑रिव्यू जर्नल में प्रकाशित होने की उम्मीद है।